आचार्य विद्यासागर महाराज, उनके सूत्र था न्यूनतम लेना, और अधिकतम देना, श्रेष्ठतम जीना यह शैली होना चाहिए विमल सागर महाराज
खिमलासा
परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री विमल सागर महाराज जी ने उत्तम आंकिचन धर्म पर बोलते हुए कहा कि यदि तीन लोग का नाथ बनना चाहते हो तो यह भावना भाए कि मैं आंकिचन हु।
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा की निर्मोही संत थे आचार्य विद्यासागर महाराज उनके सूत्र था, न्यूनतम लेना, अधिकतम देना, श्रेष्ठतम जीना यह शैली होना चाहिए। लोभ छोड़ने की प्रतियोगिता यहां प्रतिदिन होती है दुकान, घर, परिवार शरीर आदि मेरे नहीं है, जो सिद्धों के पास वैभव है वह मेरा हो। प्रतिमाधारी, वृति ब्रह्मचारी, ब्रह्मचारिणी





त्यागी को भोजन को बुलाना चाहिए।

धर्म सभा में मुनि श्री अनंत सागर महाराज ने कहा कि सब परिग्रह छोड़कर वन को चले जाते हैं संत, आंकिचन धर्म का पालन मनी तो करते ही हैं गृहस्थ भी करता है। परिक्रय की सीमा बनाना आवश्यक है। अपार धन वैभव होने के बाद भी क्या करते ही चक्रवर्ती के पास दुनिया का सबसे ज्यादा वैभव होता है। बड़े नगरों में रविवार की छुट्टी रहती है छोटे नगरों में प्रतिदिन व्यापार आदि चलता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
