आचार्य श्री का रिकॉर्ड तोड़ने वाला कोई नहीं है अनंतसागर महाराज
खिमलासा
परम पूज्य मुनि श्री 108 अनंतसागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि धार्मिक कार्य में मन लगे, उपवास के दिन, पर्व से शिक्षा लेना चाहिए, आचार्य श्री का रिकॉर्ड तोड़ने वाला कोई नहीं है, बिना तप के कोई मुक्ति नहीं मिलती है, सामर्थ्य के अनुसार तप करना चाहिए। तप की हमेशा प्रशंसा करनी चाहिए। मन में बहुत विकल्प बने रहते हैं, मन को बस में करना सबसे बड़ा मंत्र है। जो काम नहीं करना उसमे बस बहाना बनाते हैं। अनेक वर्षों तक तप किए है, आपके जीवन को अच्छा बनाना है। मनुष्य तप के द्वारा आगामी जीवन को सुंदर बनाते हैं, धर्म से शोभा होती है धन से नहीं।
इस मांगलिक बेला में पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने भी अपने भाव प्रकट किए उन्होंने कहा कि कर्म के क्षय के लिए जो तपा जाता है उसे तप कहते है। तप संसार समुद्र से पार होने के लिए जहाज के समान है। मनुष्य की एक इच्छा पूर्ण हो जाती है दूसरी इच्छा उपस्थित हो जाती है। तप महान फल देने वाले है।








इस बात पर भी ध्यान आकर्षित किया कि पूरे देश में आचार्य विद्यासागर स्मृति में स्कूल मांगलिक भवन अस्पताल होना चाहिए। जिसमें ऑडिटोरियम में आचार्य श्री के चित्र लगाए जाएं। जीव तप करने से क्षण मात्र में कर्मों को भस्म कर सकता है। 22 लाख वर्षो में करोडो की संख्या में दिगंबर जैन साधु हो चुके हैं, पहले 40 करोड़ जैन थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
