दिगंबर मुद्रा खेल नहीं क्षुल्लिका सुमैत्री श्री माताजी
रामगंजमंडी
परम पूजनीया पट्ट गणिनी आर्यिका105 विमल प्रभा माताजी संघ सहित रामगंज मंडी में वर्षा योग हेतु विराजमान है उनके
सानिध्य में 10 लक्षण पर्व पर धर्म आराधना हो रही है। उन्हीं की संघस्थ क्षुल्लिका105 सुमैत्री श्री माताजी दिगंबर मुद्रक के विषय में प्रकाश डालते हुए कहती हैं कि दिगंबर मुद्रा कोई खेल नहीं है। दिगंबर संतो के परिणाम में इतनी निर्मलता होती है कि सिंह और बैल एक घाट पर बैठकर पानी पीते हैं। वह कहती है कि महावीर भगवान की जो मुद्रा है वह तलवार की धार पर चलने की जैसी है। अगर दिगंबर मुद्रा को धारण करना है तो उसे शाश्वत करो।
दिगंबर मुद्रा को खेल नहीं बनाना है यदि हम इस खेल बनाएंगे तो हमारा जैन धर्म वैसे ही खेल बन जाएगा।
हमारे भगवान महावीर ने तो कितने उपसर्गों को जीता और कितने अपने परिणामों की विशुद्धी की कितनी समता और ममता को ध्याया और कितनों को अपने उपदेशों से प्राणियों की रक्षा की। महावीर की मुद्रा ऐसी वैसी नहीं थी। दिगंबर मुद्रा ऐसी है कि इससे व्यक्ति पतित से पावन बनता है।
सुमैत्री संदेश



वे संदेश देते हुए कहती है की
जोडलो दोलत करोड़ों की औलाद के लिए
शिक्षाधर्म की नहीं दे पाये तो
किस काम की
ले लो बोलिया लाखों की मन्दिर में
सन्तान को नित्य जिनमन्दिर नहीं
भेज पाये तो किस काम की
बना लो डॉक्टर इंजीनियर बिजनेसमैन
अपने पुत्र को भले ही
माँ जिनवाणी के ज्ञान का स्वाध्याय कर
स्वाध्यायी ना बना पाये तो
वह शिक्षा किस काम की
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
