मायाचारी से कभी उच्चाइयो को नही छुआ जा सकता मृदुमति माताजी

धर्म

मायाचारी से कभी उच्चाइयो को नही छुआ जा सकता मृदुमति माताजी
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मायाचारी से कभी भी ऊंचाईयों कोनहीं छुआ जा सकता है, यदि आपके अंदर ऋजुता, सरलता, सहजता,का अभाव है तो आगे  बढ़ने के सारे रास्ते बंद  हो जाते हैं। आज छल, कपट आत्मा को
छलनी कर रहा है। इंसानआगे बढ़ने की होड़ में एक दूसरे को
नीचा दिखाने में लगा हुआ है। यही से पतन प्रारंभ होता है।

 

यह बात श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आर्यिकारत्न श्री मृदुमति माता जी ने दशलक्षण धर्म के तीसरे दिनउत्तम आर्जव धर्म पर अपने मंगलप्रवचन में कही।उन्होंने कहा कि जहां सहजता,सरलता, मुदुता के भाव दिखाई दे वहीआर्जव धर्म है।इंसान का कार्यक्षेत्र कोई भी हो उसेप्रगति के लिए कभी भी धोखाधड़ीका  सहारा नहीं लेना चाहिए। दूसरे को जो धोखा दिया जाता है व सामने वाले को प्रभावित करे या न करे लेकिन स्वयं के साथ धोखा कर रहा है।

यह तो आज आप सब देख ही रहे होंगे कि अब न तो किसी का डर है न ही बाप का डर मनुष्य भव तभी सार्थक है जब अपने जीवन में सरलता लाते है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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