पूज्य मुनि श्री वाङ्गमय सागर जी की समाधि
कुलचारम
रात्रि 9.47पर अन्तर्मना के शिष्य पूज्य मुनि श्री वाङ्गमय सागर जी महाराज (देश के शीर्षस्थ विद्वान पंडित श्री शिवचरणलाल जैन मैनपुरीकी सल्लेखना पूर्वक समाधि हो गयी है।डोला आज सुबह 7 बजे निकलेगा।उनकी मुनिदीक्षा 28 अगस्त को हुई थी।
सोमवार की सुबह चारों प्रकार के आहार का त्याग कर दिया था। दोपहर 3 बजे अन्तर्मना केचतुर्विध संघ सानिध्य में प्रतिक्रमण किया गया था।अंतिम समय आचार्य श्री पूर्ण संघ सहित

णमोकार का पाठ कर रहे थे। आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने सर्वप्रथम उन्हे क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की बाद में मुनि दीक्षा दी। और बाद में यह संलेखना की ओर अग्रसर हो गए। जब उन्होंने सल्लेखना का क्रम शुरू किया था जो अपने आप में सभी के लिए प्रेरणा है इसे ही निष्काम साधना कहा जाएगा उस समय केवल थोड़ी सी छाछ, और जल को ग्रहण किया था। यही है
निष्प्रहता, निर्मोहीता इसे ही कहा जाएगा जैन संत की साधना एक साधु के जीवन का लक्ष्य की यही होता है कि उसके जीवन के अंत समय में सलेखना पूर्वक समाधि हो और वह भी गुरु चरणों में।
हर संत यही भावना बात है कि





दिन रात मेरे स्वामी मैं भावना यह भाऊ
देहांत के समय में तुमको ना भूल पाऊं
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
