क्रोध से जीवन नष्ट होता है क्षमा सहनशीलता से जीवन का अच्छा निर्माण होता है।क्षमा वीरों का भूषण हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

क्रोध से जीवन नष्ट होता है क्षमा सहनशीलता से जीवन का अच्छा निर्माण होता है।क्षमा वीरों का भूषण हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
पारसोला
पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 56 वे वर्षायोग हेतु पारसोला धरियावद तहसील विराजित है। पारसोला नगर में जैन समाज द्वारा प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की नवनिर्मित प्रतिमा का नगर में भव्य जुलूस निकाला गया। जगह-जगह समाज द्वारा आचार्य श्री की प्रतिमा की मंगल आरती की गई। सन्मति भवन में आचार्य श्री ने धर्म देशना में बताया कि क्रोध के विपरीत क्षमा है, माता क्षमाशील होती है पृथ्वी सहनशील क्षमाशील है‌ ,माता भी दुख सहन करती है क्षमा सहनशीलता से दी जाती है क्षमा से जीवन का निर्माण करें अच्छे निर्माण से जीवन का निर्वाण होता है ।विषय भोगों के लिए आप निर्माण करते हैं जो कि गलत है जंगल की आग को दावानल कहते हैं इस फायर ब्रिगेड बुझाते हैं इसी प्रकार आत्मा में विषय भोग की आग को संयम साधना से बुझाया जाता है आपके रूप को कषाय विकृत करती है क्रोध शरीर को खराब करता है, क्रोध से हानि होती है, एक पल के क्रोध से भी संपूर्ण जीवन नष्ट हो जाता है, क्रोध से शरीर तंत्र खराब होता है, जीवन शक्ति भी क्रोध से कम होती है। यह प्रवचन वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित धर्मसभा में दशलक्षण पर्व में उत्तमक्षमा धर्म की विवेचना करते हुए प्रकट किए
आचार्य श्री ने बताया कि मनुष्य का आभूषण रूप है ,रूप का आभूषण गुण,गुण का आभूषण ज्ञान ,ज्ञान का आभूषण क्षमा है। इसलिए क्षमा रुपी आभूषण धारण करने योग्य है ।क्षमा वीरों का भूषण है‌ क्षमा धारण करने वाला व्यक्ति विष का नहीं ,अमृत का पान करता है ।जीवन बहुमूल्य है आत्महत्या पर चर्चा करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि आत्महत्या गलत है क्रोध के कारण आत्महत्या की स्थिति बनती है मनुष्यगति सर्वश्रेष्ठ पर्याय है इसलिए धर्म को समझ कर जीवन में उतारने का प्रयास करें। कषाय क्रोध से जीवन खराब होता है क्षमा से जीवन अनुकूल होता है संसार महावन के हर परिस्थिति में क्षमाभाव रखें। अनादि काल से विषय कषाय आत्मा का घात कर रहे हैं कर्म बंघ होता है जीवन में मंगल मय अवसर धार्मिक पर्व कार्य के आते हैं इसे धर्म पुण्य कमाया जाता है समय निकल जाने पर धर्म का उपार्जन नहीं होता जैन संस्कृति पर्वों की संस्कृति है पर्व दशलक्षण पर्व , अष्टानिका वर्ष में तीन बार आते हैं अष्टानिका में नंदीश्वर दीप के कृत्रिम चैत्यालयों की पूजा यहां बैठकर कर सकते हैं । धार्मिक त्योहारों पर जागृत रहने की जरूरत है धार्मिक त्योहार पुण्य कमाने का अवसर लेकर आते हैं अनादि काल से आप पापों का अर्जन कर रहे हैं दश लक्षण पर्व आया है आपने कर्मों का संचय किया है कर्मों के नाश करने का अवसर धार्मिक पर्व में तप त्याग संयम से मिलता है। धार्मिक अनुष्ठान दिनभर किए गए प्रातः काल आचार्य श्री के साहित्य में श्री जी का भाव पंचायत मत अभिषेक परिवारों द्वारा किया गया धर्म सभा में पूर्वाचार्य के चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन राजेश पंचोलिया इंदौर ,नरेश घाटलिया तथा समाज जनों ने किया‌ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य भी राजेश पंचोलिया एवम अन्य सौभाग्यशाली को प्राप्त हुआ।राजेश पंचोलियां इंदौर से प्राप्तजनकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312  

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