अंतिम श्वास तक दम लगाए रखना, कई बार वेंटिलेटर से भी मरीज लौट आता है। मुनि श्री सुधासागर महाराज 

धर्म

अंतिम श्वास तक दम लगाए रखना, कई बार वेंटिलेटर से भी मरीज लौट आता है। मुनि श्री सुधासागर महाराज 
मझोली, जबलपुर म.प्र.
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री सुधा सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि प्रकृति ने कुछ सिस्टम बना दिए कि कोई भी कार्य करते समय ये तुम्हारे ज्ञान में नही आ आ पायेगा कि तुम्हे कौन सा कर्म बंध रहा है। यदि कर्म करते समय यह व्यक्ति की ज्ञान में आ जाए इस जीव से कोई भी बुरा कार्य नहीं हो पाएगा।

 

 

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे कानून की धाराएं आपको मालूम है कि मैंने यह कार्य किया तो मुझे यह धारा लग जाएगी तो गुस्सा तो आता है लेकिन उस धारा के डर से पाप नहीं करते लेकिन धर्म क्षेत्र में सृष्टि के अदृश्य नियमों ने कहा कि नहीं, इसको डर दिखाकर पाप से नहीं बचाओ, इसको पता ही नहीं चलने दो कि जो मैं पाप कर रहा हूँ, इसकी क्या सजा भोगनी पड़ेगी क्योंकि डर के कारण ये पाप छोड़ तो देगा लेकिन मन से दिन रात पाप करता रहेगा।

 

महाराज श्री ने राजनीति के विषय में कहा कि राजनीत कहती है कि तुम्हे मन से जितने पाप करना है करो, वचन और काया से मत करना क्योंकि मन से किए हुए पाप के लिए कोई धारा नहीं है। धर्म कहता है इनको भय मत दिखाओ, इन्हें अपना स्वरूप या स्वभाव समझाओ कि तुम्हारा यह कार्य करना स्वभाव नहीं है, तुम अपने स्वभाव को पहचानों। तुम जो कर्म कर रहे हो इसका स्वभाव क्या है? अग्नि से डराया नहीं गया, अग्नि का स्वभाव समझो कि अग्नि का स्वभाव है जलाना। जब स्वभाव को समझ जाओगे तो तुम पाप डरकर नहीं छोड़ेंगे, तुम्हे कहोगे कि मुझे धर्म करना है, अधर्म नहीं लेकिन धर्म की बात समझ में आना बहुत कठिन है।

गृहस्थ के विषय में बोलते हुए कहा की गृहस्थ बिना आलंबन के नहीं चल सकता, उसे कोई न कोई आलंबन चाहिए। अब आलंबन किसका लेना है यह निर्णय आपको करना है। धर्मात्मा जीव देव शास्त्र गुरु का आलंबन लेता है। निमित्त तुम्हें नहीं सुधारेगा, निमित्त पाकर तुम सुधर जाओ। हमारे नगर में भगवान है तो अभिषेक करके हम अपनी जिंदगी सुधारेंगे। तुम समझो कि भगवान कभी हमें सुधार देगा, बिल्कुल नही सुधारेगा। भगवान को पा करके हमें सुधरना है।

 

परिश्रम से जो वस्तु मिलती है, उसमें नियम से शगुन होता है, मंगल होता है, उसमें इतनी शक्ति होती है कि ऐसे चमत्कार और अतिशय हो जाते हैं कि व्यक्ति सोच भी नहीं पता, इसलिए जब कभी मेहनत करके निमित्त मिले तो उस निमित्त से अपनी जिंदगी को सुधारना।

उन्होंने कहा अंतिम श्वास तक किस्मत पर मत जाना, अंतिम श्वास तक दम लगाए रखना, पता नहीं वेंटिलेटर से भी मरीज लौट आता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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