पर दया के साथ करें निज दया :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी

धर्म

पर दया के साथ करें निज दया :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुंसी

श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुंसी (राज.) में विराजित गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने धर्म सभा में धर्मोपदेश देते हुए कहा कि – इस जगत में अधम से अधम कोई पुरुष है , तो वह है पर की चिंता करने वाला ।

 

 

करुणा – दया करना सीखना , दूसरे के कष्ट को देखकर यदि सम्भव हो तो सहयोग करना , परन्तु दूसरे के कष्ट को देखकर स्वयं रोना नहीं , क्योंकि भावों को कलुषित करना ही हिंसा है ।

 

दया करना , परन्तु निज पर अदया करके पर के प्रति दया करने नहीं जाना । निज पर दया करके पर के प्रति दया करना ।
कोटा से पधारे हुए गुरु भक्तों ने पूज्य गुरु माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया । मालवीय नगर समाज ने माताजी ससंघ की निर्विघ्न आहारचर्या कराने का सौभाग्य प्राप्त किया ।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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