तीर्थ प्रेरक एवम पर्यावरण सरक्षण की मुहिम को लेकर जन-जन को प्रेरित कर रहे हैं प्रज्ञा सागर महाराज 52 वे अवतरण दिवस पर विशेष
आज हम तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज अवतरण दिवस मना रहे हैं। पूज्य गुरुदेव ने अपनी साधना संयम अपने उद्बोधन से प्राणी मात्र का कल्याण किया है। इन्होंने ऐसे तीर्थों के सृजन में प्रेरणा दी है जो संपूर्ण विश्व में जैन धर्म की ख्याति को पल्लवित कर रहा है।
आचार्य श्री ने जिन तीर्थों का सपना देखा वहा आज प्राणी मात्र जाकर अपने जीवन को धन्य कर रहा है। जिसमें उज्जैन स्थित तपोभूमि, समवशरण तीर्थ भरूच, आदिश्वर धाम चाकसू, बापू गांव में भी एक तीर्थ के निर्माण में गुरुदेव की अहम भूमिका है। इसी के साथ चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांति सागर महाराज की स्थली भोज ग्राम में भी शांति सागर धाम का निर्माण कर जैन धर्म की प्रभावना में अमूल्य योगदान है।

इनका वर्णन बहुत व्यापक एवं विस्तृत है यदि हम इनके वैराग्य के विषय में जाने तो इन्होंने महज 13 वर्ष की आयु में संसार की मोह माया से विरक्त होकर गृह त्याग कर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया महज 17 वर्ष की आयु में मुनि दीक्षा ली।

1 सितंबर 1973 को इन्होंने मंडला जिले के पिंडरई में जन्मलिया एवं माता सरस्वती देवी जैन पिता वीर चंद्र जैन को धन्य किया इनके संस्कारों का पल्लवन इतना हुआ कि आगे चलकर विवेक प्रज्ञा सागर महाराज बन गए आप सचमुच साधना की प्रतिमूर्ति हैं। 
18 अप्रैल 1989 को आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज से परतापुर में मुनि दीक्षा ली और दीक्षा के बाद उन्हें मुनि श्री प्रज्ञा सागर महाराज नाम दिया गया। ज्ञान रूपी प्रज्ञा से आज जैन धर्म की प्रभावना करने में गुरुदेव के योगदान को हम नहीं भूल सकते युवा शक्ति को आगे लाने में महाराज श्री का योगदान अमूल्य माना जाएगा चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र में समाज की प्रतिभा हो
कला के क्षेत्र में समाज की प्रतिभा हो या जैन पत्रकारों को आगे लाना हो गुरुदेव ने सदैव सभी को प्रेरित किया जो अविस्मरणीय है। हाल ही में आपकी प्रेरणा से विगत दिनों पूर्व पुष्पगिरी तीर्थ पर भी एक अलौकिक जिनालय का निर्माण हुआ है जो संपूर्ण विश्व में जैन दर्शन की पताका को फहरा रहा है। श्रवणबेलगोला में हुए मस्तकाभिषेक में भी गुरुदेव का सानिध्य भक्तों को मिला उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम संपूर्ण भारतवर्ष के साथ संपूर्ण विश्व में जैन दर्शन की ख्याति को एक नया आयाम गुरुदेव के द्वारा मिला।
साधना के पथ पर बढ़ते हुए एवं गुरु आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर उन्होंने जो किया वह सभी के लिए अविस्मरणीय हैं और उनकी साधना को देखते हुए आचार्य श्री पुष्पदंत सरकार महाराज ने उन्हें आचार्य पद
प्रदानकिया। यह हाडोती का पुण्य है कि पूज्य महाराज श्री का मंगल वर्षा योग झालरापाटन की धरा पर हो रहा है। उनका आशीर्वाद लेने उपदेश सुनने हेतु मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री श्री मोहनलाल यादव आते रहते हैं। और वह विधायक से कैबिनेट मंत्री कैबिनेट मंत्री से मुख्यमंत्री तक का सफर तय कर चुके हैं।
इस दिन पर यही कामना करते हैं कि गुरुदेव
दीर्घायु हो, पूर्णायू हो, आप चिरायु हो, हम सब की भी उम्र लग जाए आप शतायु हो।
कोटि कोटि नमोस्तु अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
