हमारा चारित्र अच्छा नहीं होगा तो हमारा जीवन भी अच्छा नहीं बनेगा दुर्लभ सागर महाराज
बांसातारखेड़ा
परम पूज्य मुनि श्री 108 दुर्लभ सागर महाराज ने अपने प्रवचन में चारित्र के विषय में प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि चारित्र को सम्मान देना चाहिए। चारित्र का उदाहरण जैसे रूप जिसके पास पवित्रता होती है, जिसके पास निर्मलता होती है, जिसके पास चारित्र होता है, उसको देवता भी शीश झुकाते हैं।
महाराज श्री ने आगे कहा कि हमारा चारित्र अच्छा नहीं होगा तो हमारा जीवन भी अच्छा नहीं बनेगा। अगर हमें अपने जीवन को निर्मल बनाना है तो महान आत्माओं के चारित्र को पढ़ना चाहिए, सुनना चाहिए, अपने आचरण में उतरना चाहिए। जितना हम महान आत्माओं के चारित्र को पढ़ेंगे तो हमारा वैराग्य और भी प्रबल होगा।

उन्होंने प्रकाश डालते हुए कहा कि चारित्र को सुन करके अंदर से गदगद होना है और भावना भानी है की भगवान जिस तरह आपका चारित्र है वैसे ही मेरे अंदर भी चारित्र प्रबल बने। अगर हम गदगद होकर चारित्र को पढ़ते हैं तो चारित्र की विनय होगी, वैराग्य प्रबल होगा।
महाराज श्री ने इसके विषय में जोर देते हुए कहा कि अगर चारित्र को आचरण में लाना है तो गुरुओं की शरण में जाओ और उनके जैसे बनने के भाव को हृदय में उत्पन्न करो तो हमारा चारित्र निर्मल बनेगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
