श्रावक संस्कार शिविर सागर बर्ष 2024* *आप भी आ रहे हैं ना*सागर मे सुधासागर कविता कवि सौरभ जैन भयंकर चंदेरी 

काव्य रचना

श्रावक संस्कार शिविर सागर बर्ष 2024* *आप भी आ रहे हैं ना*सागर मे सुधासागर कविता कवि सौरभ जैन भयंकर चंदेरी 
*श्रावक संस्कार* शिविर की महिमा निराली है
हर शिविरार्थी यहां *कषायों* से खाली है

 

 

 

सुबह से उठना और *ध्यान* लगाना है
*बीज़ा अक्षर* की शक्ति तक हमको जाना है

*शांति धारा* अभिषेक, फिर *पूजन* की तैयारी है
*जगत पूज्य* ने पर्युषण की महिमा उजयारी है

आहार को जब *भइया जी* घर घर जाएँगे
*उत्कृष्ट चर्या* से सभी श्रावक पूजे जाएँगे

 

फिर *ध्यान, सामायिक ,जप* की बारी है
प्रत्येक श्रावक गुरु का *अज्ञाकारी* है

 

 

ना किसी से *रिश्ता*, ना किसी से नाता है
सुधा सागर पिता तुल्य हैं, *शिविरार्थी भ्राता है*

हर काम जबरदस्त,कोई मिले यदि *नटखट*
उसको भी उचित *सजा* यहाँ मिले झटपट

गुरु का *आशीर्वाद* पाकर मुस्कराना है
शाम को *गुरु भक्ति* में झूम झूम जाना है

*परमेष्ठी* की आरती मगन होकर गायेंगे
*चिंता तनाव दुःख* सब कुछ भूल जाएंगे

स्वाध्याय के बाद *स्वचिन्तन* की तैयारी है
बस ये समझ लो, अब *मोक्ष मार्ग* की बारी है
 कवि सौरभ जैन*
भयंकर चंदेरी 9981082655

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