मन और मानव तब तक अच्छे हैं..जब तक आपके अनुकूल है..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज/ कुलचाराम हैदराबाद
मन और मानव तब तक अच्छे हैं.जब तक आपके अनुकूल है..!मन, मानव और विचारों को शान्त करने के लिए साधना का मार्ग है। साधना का अर्थ है – मन, मानव और विचारों को बस में करना। जिसने मन और विचारों को साध लिया, उसने साधना के शिखर को छू लिया। मन्त्र, जाप, पूजा, पाठ, व्रत, नियम, संयम ~ मन और विचारों को साधने के पथ हैं। अपनी कमियों और बुराईयों को दूर करने का नाम ही साधना है।
जिसका मन पवित्र है, सरल है और ऊँचा है, उसका भाग्य भी अच्छा और ऊँचा है। जिसका मन और विचार खोटा है, ओछा है, बुराईयों से भरा है,, उसका भाग्य और भविष्य भी नीचा और अन्धकार मय है। *संसार में सबसे ज्यादा पावरफुल मन ही है। मन ही सबसे बड़ा एटम बम है, विध्वंसक है, विस्फोटक है, बम स्वयं विस्फोट नहीं करता।
जब मन का बटन दबता है, तब ही उस बम का बटन दबाया जाता है। जीवन में सब खेल मन और विचारों का है। इसलिए दोनों पर कन्ट्रोल करो, तभी ज़िन्दगी जीने का आनंद आयेगा…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
