परम पूज्य मुनिश्री योगसागर महाराज संघ की तपोदय तीर्थ पर मुनिश्री वैराग्य सागर व सुप्रभ सागर ने की अगवानी 

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परम पूज्य मुनिश्री योगसागर महाराज संघ की तपोदय तीर्थ पर मुनिश्री वैराग्य सागर व सुप्रभ सागर ने की अगवानी 

 बिजौलिया ज्येष्ठ निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योग सागर महाराज का संघ सहित पार्श्वनाथ तपोदय तीर्थ क्षेत्र पर मंगल आगमन हुआ।दर्शन और आशीर्वाद के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

 

 

 

  क्षेत्र पर संघ की अगवानी मुनिश्री 108वैराग्य सागर महाराज व मुनिश्री 108सुप्रभ सागर ने की। तीर्थ क्षेत्र कमेटी, बिजौलिया जैन समाज, महिला व युवा मंडलों ने मंगल पाद-प्रक्षालन आरती कर उनकी अगवानी की।

 

  मुनिश्री ने सैंडस्टोन की प्रशंसा प्रतिमा निर्माण के लिए उत्कृष्ट बताया 

ज्येष्ठ निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज ने कहा कि वे प्रदेश के प्रमुख तीर्थों की वंदना करने निकले हैं। उन्होंने बिजौलिया को महान तपोभूमि बताते हुए कहा कि यही वह पावन स्थल है, जहां भगवान पार्श्वनाथ ने तप कर केवलज्ञान प्राप्त किया। उनके उपदेशों को आत्मसात कर साधक अपने कर्मों की निर्जरा कर सकता है

 

 

 

 

मुनिश्री ने क्षेत्र के सेंडस्टोन की भी प्रशंसा की, जिसे प्रतिमा निर्माण के लिए उत्कृष्ट बताया। इस पत्थर से निर्मित प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा आचार्य विद्यासागर महाराज बुंदेलखंड के अनेक तीर्थों में करा चुके हैं।

 

 

लक्ष्मी चाहिए तो धर्म मार्ग अपनाना होगा मुनिश्री 

 ज्येष्ठ मुनिश्री 108योग सागर महाराज ने कहा कि यदि लक्ष्मी चाहिए तो धर्म मार्ग अपनाना होगा। लक्ष्मी स्वयं भगवान को मानने और धर्माचरण करने वालों के पास आती हैं। उन्होंने संदेश दिया कि धन के पीछे नहीं, धर्म के पीछे चलेंगे तो ही जीवन का सच्चा कल्याण संभव है। मुनि ने प्रेरित किया कि हम भगवान पार्श्वनाथ की भांति आत्मोन्नति के पथ पर अग्रसर हों। 

 

4 मार्च को तप कल्याणक दिवस पर होने वाले वार्षिक मेले को मुनि संघ के सानिध्य में मनाने के लिए तीर्थ कमेटी ने श्रीफल भेंट कर निवेदन किया।

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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