यह संकल्प लें कि आप कभी दुर भाव नहीं करेंगे आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
डोंगरगढ़
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज ने चंद्र गिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में रविवार के प्रवचन में कहा कि आप लोग बहुत गर्मी का अनुभव करके चंद्र गिरी की ओर आए हैं। यह लो का कांच बहुत बड़ा है जिसमें दो ग्रह सूर्य और चंद्रमा ऐसे हैं जो प्रतिदिन आपकी सेवा करने आते हैं। उनकी सेवा यदि 1 दिन भी छूट जाए तो आपका सारा काम प्रभावित हो जाएगा। चाहे वर्षा हो, आंधी तूफान हो फिर भी वह आपकी सेवा करने आते हैं। आज तक उनकी सेवा में कोई परिवर्तन नहीं आया परंतु आप लोगों का स्वभाव विभाव के कारण परिवर्तित होकर दुर्भाव होते गया। सूर्य और चंद्र की सेवा यात्रा का स्वाद उपयोग करो अच्छी बात है लेकिन इसका दुरुपयोग ना करें अनेक प्रकार के धातु होते हैं सोना चांदी लोहा आदि एक पारा होता है जो विशेष रूप से सोनार वगेरह के पास होता है। कुछ व्यक्ति 12 को शोधित करके चिकित्सा करते हैं जिससे पेट का पुराना रोग ठीक हो जाता है पारा को आप वर्जनी से पकड़ कर दूसरे हाथ से लेना चाहे तो नहीं आएगा। कितना भी प्रयास कर लो वह एक हाथ से दूसरे हाथ में नहीं जा पाता।
उन्होंने कहा मान लो थोड़ा सा गोबर की दलील देकर उसमें पारे को बिठाया जाए तो वह उसके ऊपर बैठ जाता है और वही चिपक जाता है। आप लोग भी इसी प्रकार संसार में आकर फस गए हो और कुछ दाम देकर वहां से निकलना चाहे तो नहीं निकल सकते हैं यदि भगवान के सामने संकल्प लें की दुर्भाव नही करूंगा। तो आपका स्वभाव विभाव में भी नहीं बिगड़ेगा। अब इस बारे को शोधित कर जलाकर या शेख कर वह पारा भस्म राख बन जाता है। अब उसे रात को आप कैसे भी उठा सकते हो शिक्षिका द्वारा उसे दवाई के उपयोग में लिया जाए तो वर्षों का रोग ठीक हो सकता है। पारा अग्नि में जलकर औषध के रूप में परिवर्तित हो गया।
पथ पर चलना अनिवार्य ताकि संसार से दूर ना हो
आचार्य ने हमें बताया है जिसमें हमे निर्दोष चलना है संसार में रहकर भी संसार से दूर हो सकते हो इसके लिए पथ पर चलना अनिवार्य है। भोजन की मात्रा में यदि अधिकता होती है तो पथ्य भी कुपथ्य हो जाता है। मां अपने बच्चे को कितना भोजन देना है बहुत अच्छे से जानती हैं वह उतना ही देती हैं जिससे बच्चा अच्छे से बचा सके कभी ज्यादा नहीं देती। ऐसी ही जिनवाणी मां के माध्यम से आचार्य ने हमारे लिए पद बताया है जिसका निर्दोष पालन करना है तभी उन्नति होगी आप लोगों को सद्भावना रखना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
