मनुष्य को न्याय मार्ग में स्थित रहना चाहिए विज्ञानमति माताजी
बांसवाड़ा
श्रेयासनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगल प्रवचन देते हुए आर्यिका 105 विज्ञान मति माताजी ने कहा कि मनुष्य को न्याय मार्ग में स्थित रहना चाहिए। न्याय मार्ग से कभी भटकना नहीं चाहिए। न्याय से ही व्यक्ति को हित अहित का ज्ञान होता है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अन्याय, अनीति से व्यवहार करने लगता है वह जीवन में कभी सफलता को प्राप्त नहीं कर पाता। उसे लगता है उसने अन्याय के माध्यम से इतनी ऊंचाई को प्राप्त किया है। जबकि उसकी सफलता क्षणिक है। कर्म न्याय करता है तो व्यक्ति अर्श से फर्श पर आ जाता है।






माताजी ने कहा कि दयालु व्यक्ति को देव नमस्कार करते हैं। जिसके हृदय में दया है, वही व्यक्ति अहिंसात्मक जीवन व्यतीत करता है। दया ही धर्म का आधार है। दया ही धर्म है। जिसके अंदर दया भाव नहीं वह व्यक्ति कितना भी पूजा पाठ जाप माला आदि कर ले, उसका वह सब करना व्यर्थ है। उसकी पूजा पाठ आदि से कुछ कल्याण नहीं होगा। हमें संसार रूपी जंगल में भटकने से डरना चाहिए। क्योंकि व्यक्ति इस संसार रूपी जंगल में कई भवों से भटक रहा और दुखों को भोग रहा है।
माताजी ने अंत में कहा कि सत्यवादी, प्रियवादी और विनयवान इन तीनों के बस में पूरी दुनिया होती है। इसका आशय समझाते हुए माताजी ने कहा कि जिसके अंदर सत्य, प्रिय और विनय यह तीन गुण होते हैं, वह पूरे संसार को जीत लेता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
