रिश्तो में भरोसा करो..मगर किसी के भरोसे मत रहो.. रिश्तों में सहयोग से ज्यादा साथ जरूरी है और वो भी निस्वार्थ..! प्रसन्न सागर महाराज

धर्म

रिश्तो में भरोसा करो..मगर किसी के भरोसे मत रहो.. रिश्तों में सहयोग से ज्यादा साथ जरूरी है और वो भी निस्वार्थ..! प्रसन्न सागर महाराज 

टोक

 अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज की अहिंसा संस्कार पदयात्रा राजस्थान के परतापुर बांसवाड़ा के लिए चल रही है उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि रिश्तो में भरोसा करो..मगर किसी के भरोसे मत रहो.. रिश्तों में सहयोग से ज्यादा साथ जरूरी है और वो भी निस्वार्थ..! इसलिए  जो सुख में साथ दे वो रिश्ते, और जो दु:ख में साथ दे वो फ़रिश्ते। 

 

 

रिश्ता कोई भी हो – यदि वह शक की दीमक से दूर है और विश्वास नींव से मजबूत है, तो कभी डेमेज नहीं हो सकता। रिश्ते किसी कागज पर लिखी शर्तो पर नहीं चलते, क्योंकि जरूर मुकरे होंगे वे लोग जुबान देकर, वरना कागजों की जरूरत रिश्तों में नहीं पड़ती।

 

 रिश्ते भावनाओं की गिली मिट्टी के मानिन्द हुआ करते हैं, जो विश्वास की धूप और प्रेम समर्पण के पानी से मजबूत होते रहते हैं । जहां रिश्तों में शक का प्रवेश हुआ तो विश्वास डगमगाने लगता है और धीरे-धीरे रिश्ते भीतर ही भीतर खोखले होने लगते हैं। फिर रिश्तों और सम्बन्धों की उम्र रोज रोज घटने लगती है।

 

बाहर से सब कुछ सामान्य दिख सकता है, बातचीत भी सामान्य रूप से चलती रहेगी, साथ उठना-बैठना, खाना-पीना भी चलता रहेगा, लेकिन भीतर से कहीं न कहीं दरार पड़ चुकी है। यह दरार एक दिन में नहीं बनती, बल्कि यह दरार भीतर ही भीतर रिश्तों को खोखला करती जाती है। जैसे – कभी एक झूठ, कभी अधूरा सच, कभी वक्त पर साथ न खड़े होने की टीस, यह सब छोटे-छोटे से कारण विश्वास की नींव को कमज़ोर करने लगती है।

 

आज की तेज रफ्तार की ज़िन्दगी में अक्सर कहा जाता है कि समय नहीं, बल्कि रिश्तों की अहमियत कम हुई है। *रिश्तों को जिन्दा रखने के लिए कोई बहुत बड़ा त्याग नहीं करना, बल्कि छोटे-छोटे सच और थोड़ा रिश्तों की भावनाओं का ध्यान रखना है। पुरानी पीढ़ियों के रिश्ते इसलिए निभ रहे थे, क्योंकि उनके पास भरोसा गहरा था और संवाद का धैर्य था। रिश्ते जीवन की सबसे बड़ी कमाई है। इन्हें सम्भालने के लिए थोड़ा समय, थोड़ा वाणी व्यवहार, और थोड़ा मान सम्मान का ध्यान रखा जाये तो सब कुछ अच्छे से अच्छा हो सकता है ।

 

 

झुकने से रिश्ते बनते हैं, तो झुक जाओ और यदि बार-बार आपको ही झुकना पड़े तो रूक जाओ…!!! आज अहिंसा संस्कार पदयात्रा दिशा: जहाजपुर होते हुए अंदेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ क्षेत्र, एवम् परतापुर, बांसवाडा राजस्थान की ओर बढते गुरुचरण परम पूज्य गुरुदेव भारत गोरव विश्व के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी उत्तम सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ सहित का भव्य मंगल 👣 पद विहार दिनाँक 16 फरवरी 2026, सोमवार,सुबह 6.30 बजे श्री चन्द्रप्रभू दिगम्बर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र, मेन्हदवास, जिला टोँक, राजस्थान से मंगलपेट्रोल पम्प,देवरावास मोड, हाईवे, जयपुर-कोटा रोड 18 किलोमीटर के लिए होगा।

 

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *