उम्मीद भी एक जिद है..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
कुलचाराम हेदराबाद
उम्मीद भी एक जिद है..! आज हर एक आदमी, उम्मीद – आस और विश्वास के साथ जीवन घिसट घिसट कर जी रहा है। *थके हारे उबाऊ जीवन जीने वाले लोगों को देखकर लगता है कि जीवन सचमुच अन्धकार मय है*। यदि आकांक्षाएं न हो तो जीवन प्रकाशमय हो सकता है। क्योंकि विवेक के बिना सारी इच्छाएं, आकांक्षाएं अन्धी है, सारा ज्ञान व्यर्थ है यदि तदनुरूप आचरण न हो।
*जब आप सेवा, परोपकार, धर्म और सत्संग को बिना इच्छा
और अपेक्षाओं से करते हैं, तो स्वयं के स्वभाव और परमात्मा को अपने निकट पाते हैं।* परमात्मा के निकट से तात्पर्य है – संकल्प से चलना और समर्पण से पहुंचना। संकल्प और समर्पण का



तभी फल सम्भव हो सकता है, जब हम आत्म विश्वास से भरे और दृढ़ निश्चय से चलें।
प्रसन्नसागर महाराज ने कहा कि सकारात्मक सोच और उत्साही मन ही हमारे सभी कार्यों की सफलता है। *यदि आप दुःख में से सुख खोजना चाहते हैं तो सुख खोज सकते हैं, बशर्त है सकारात्मक सोच…!!!* नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी99297947312
