बहुत देर बाद समझ आता है..बहुत देर हो जाने का मतलब..?*अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
कुलचाराम हैदराबाद
बहुत देर बाद समझ आता है..
बहुत देर हो जाने का मतलब..?*
जब बच्चों को समझाने, सिखाने, बताने और डांटने का वक्त था, तब हमने लाड-प्यार देकर, और यह बोलकर बच्चों की गलतियों को नजरअंदाज कर दिया, कि अभी तो ये बच्चा है। *
अरे भाई यह समय 1995 के बाद चला गया। क्योंकि टीवी 1995 तक हमारे देश में बच्चे पैदा हो रहे थे,
पूज्य मुनि श्री ने कटाक्ष एवं आज के वर्तमान परिपेक्ष पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 1995 के बाद, अब घरों में बच्चे नहीं बल्कि बच्चों के बाप पैदा हो रहे हैं।आज हर माता पिता अपने बच्चों की अच्छी से अच्छी शिक्षा को लेकर चिंतित, परेशान है। लेकिन कोई भी माता पिता अच्छे संस्कारों के लिए चिन्तित, परेशान नहीं है।
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आज बच्चे इन्टरनेट और मीडिया के दुरूपयोग, प्रबुद्ध और आदर्श समाज से विमुख होते जा रहे हैंमहाराज श्री
महाराज श्री ने कहा की कोरोना काल में आप सब ने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए मोबाइल हाथ में थमा दिया, अब बच्चों के हाथ से मोबाइल नहीं छूट पा रहा है। ऐसे कई बच्चे हैं जिन्होंने अपने माता-पिता को छोड़कर मोबाइल को ही अपना अभिभावक और गार्जियन बना लिया है।
आज संस्कारों और नैतिक मूल्यों के अभाव के चलते युवक युवतियाँ अपने मार्ग और लक्ष्य से भटक रहे हैं, जो माता पिता के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि जिन माता पिताओं ने, अपने जीवन के तमाम सुख सुविधाओं को छोड़कर, अपने बच्चों को काबिल बनाया और वही बच्चे सफल होने पर अपने माता-पिता का साथ छोड़कर बाहर चले जाते हैं।


इसका मूल कारण आधुनिकता की दौड़ में, नैतिकता और संस्कारों के अभाव में ही यह विकृतियां हावी होती चली जा रही है। इन पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है अन्यथः………!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

