सिद्धचक्र विधान में दिखा अद्भुत दृश्य: समवसरण में प्रकट हुआ सफेद सर्प, श्रद्धालुओं ने माना ‘रक्षक देव’ का दिव्य संकेत
कारीटोरन अतिशय क्षेत्र में सिद्धचक्र महामंडल विधान का ऐतिहासिक समापन, हजारों श्रद्धालुओं ने देखा आस्था से जुड़ा अलौकिक क्षण
कारीटोरन (ललितपुर, उत्तर प्रदेश)।
उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले स्थित प्रसिद्ध दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री शांति-कुन्थु-अरहनाथ भगवान मंदिर, कारीटोरन जी में आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन दिवस पर गुरुवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे आयोजन स्थल को आश्चर्य, श्रद्धा और भक्ति के भावों से भर दिया। विधान के अंतिम अर्घ्य के दौरान भगवान के समवसरण में अचानक एक सफेद रंग का अत्यंत पतला सर्प दिखाई दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार इसे ‘रक्षक देव’ का दिव्य संकेत मानते हुए श्रद्धापूर्वक नमन किया।

16 से 23 जुलाई तक आयोजित इस भव्य धार्मिक महोत्सव का आयोजन समाधि साधक, राष्ट्रसंत, गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज की परम प्रभावक शिष्या भारत गौरव गणिनी गुरु मां विंध्यश्री माताजी के मंगल सानिध्य तथा ज्योति भूषण प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेश कुमार जी (डीमापुर) के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। समापन अवसर पर हवन, पूर्णाहुति और विविध धार्मिक अनुष्ठानों के साथ वातावरण भक्तिमय हो उठा।
मंत्रोच्चार के बीच हुआ अद्भुत दृश्य, हजारों श्रद्धालु बने साक्षी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह लगभग 8 बजे गुरु मां बिन्धश्री माताजी के मुखारविंद से मंत्रोच्चार चल रहा था और इंद्र-इंद्राणियां अंतिम अर्घ्य अर्पित कर रहे थे। तभी भगवान के समवसरण में धागे जैसी आकृति वाला सफेद सर्प दिखाई दिया। कुछ ही क्षणों में उसकी लंबाई लगभग डेढ़ फीट हो गई और उसने फन फैलाकर सिद्धचक्र तथा गुरु मां की दिशा में अपना मुख कर लिया।

इस अप्रत्याशित दृश्य को देखकर पूरे पांडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। अनेक श्रद्धालुओं ने इसे अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार दैवी संरक्षण का संकेत बताते हुए सिद्धचक्र विधान की आध्यात्मिक महिमा से जोड़ा।

गुरु मां बिन्धश्री माताजी ने बताया सिद्धचक्र विधान का आध्यात्मिक महत्व
विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुरु मां विंध्यश्री माताजी ने कहा कि सिद्ध परमेष्ठियों की आराधना आत्मा को कर्मबंधन से मुक्त करने का सर्वोच्च साधन है। सिद्धचक्र विधान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, साधना और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का दिव्य माध्यम है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा, संयम और सदाचार को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।

कारीटोरन में साकार होंगी नई धार्मिक योजनाएं
ज्योति भूषण प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेश कुमार जी ने बताया कि पूज्य गुरु मां के आशीर्वाद से कारीटोरन क्षेत्र में गुरुकुल सहित अनेक धार्मिक एवं सामाजिक परियोजनाएं शीघ्र प्रारंभ की जाएंगी। उन्होंने श्रद्धालुओं के समक्ष यह भावना भी व्यक्त की कि वर्ष 2027 का चातुर्मास भी कारीटोरन अतिशय क्षेत्र में संपन्न हो।
विमान रथ यात्रा और जल बिहार महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब
समापन के बाद भगवान श्रीजी की भव्य विमान रथ यात्रा गुरु मां बिन्धश्री माताजी के मंगल सानिध्य में गांव के प्रमुख मार्गों से निकाली गई। जयघोष, भक्ति और श्रद्धा के बीच निकली इस शोभायात्रा का समापन जल बिहार महोत्सव के साथ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
विद्वानों ने संपन्न कराए सभी धार्मिक अनुष्ठान
विधानाचार्य ब्रह्मचारी अरुण भैया जी, पंडित राकेश जी बैसा, पंडित गगनदीप जी बड़ागांव तथा उमेश एंड पार्टी (घुवारा) ने सभी धार्मिक अनुष्ठानों का विधिवत संचालन किया।
अंत में ट्रस्ट बोर्ड के महामंत्री डॉ. श्रेयांश जैन ककरवाहा ने सभी अतिथियों का चंदन एवं श्रीफल से सम्मान किया तथा आयोजन को सफल बनाने वाले सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और सेवाभावियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

