श्री जी के अभिषेक करते समय कलश श्री जी से टकराने से अतिशय ओर गुणों में कमी होती हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

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श्री जी के अभिषेक करते समय कलश श्री जी से टकराने से अतिशय ओर गुणों में कमी होती हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

टोंक

भगवान के दर्शन ,अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय विनय पूर्वक सावधानी से करना चाहिए प्रतिमा चाहे पाषाण धातु या रत्न की हो पंचकल्याणक में सूरीमंत्र की क्रिया से गुणों का आरोपण कर प्रतिमा को पूजनीय बनाया जाता है। इसलिए अभिषेक करते समय कलश ,कपड़े या शरीर का अंग भगवान को स्पर्श नहीं होना चाहिए भगवान के मस्तक पर ,प्रतिमा पर कलश टकराने से भगवान के अतिशय , गुणों में कमी होती है। इसलिए जिनालय में प्रवेश से लेकर मंदिर में रहने तक पूर्ण विधि विधान और विनय पूर्वक सावधानी रखना चाहिए। जिन दर्शन से पाप कर्म नष्ट होते हैं सम्यक दर्शन की प्राप्ति धार्मिक पुरुषार्थ से होती हैं।

प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी प्रवचन माला के अंतर्गत धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने यह धर्मदेशना दी।राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि अनछने जल में कितने जीव होते हैं क्या दोष हैं माताजी ने अनेक उदाहरणों से बताया हैं।आज नन्हे बालक को माता पिता एवं परिजन भगवान ओर गुरुओं के दर्शन ओर आशीर्वाद दिलाया।माता पिता परिजनों को बच्चों को संस्कार देना चाहिए प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी ने गर्भवती महिला श्राविका को रात्रि भोजन त्याग का नियम दिया।यद्यपि वह महिला का रात्रि भोजन आजीवन त्याग था वह विदुषी महिला ने संकेत समझ कर शिशु को रात्रि भोजन नहीं कराया और आज वह शिशु 80 वर्ष के डॉ कल्याण गंगवाल पुणे निवासी का रात्रि भोजन त्याग का नियम चल रहा हैं देश विदेश में भी नियम का पालन किया। मंदिर मानस्तंभ से मिथ्यात्व दूर होता हैं।समाज प्रवक्ता पवन कंटान व विकास जागीरदार अनुसार आचार्य श्री के प्रवचन के पुर्व आर्यिका श्री पद्मयश मति ने प्रवचन में बताया कि अनछने पानी की एक बूंद में वैज्ञानिकों अनुसार 36450 जीव होते हैं जबकि जैन शास्त्रों अनुसार असंख्यात जीव होते है इसलिए पानी पीने , भोजन बनाने सहित सभी कार्यों में छने हुए पानी का मर्यादा अनुसार उपयोग करने से पाप नहीं लगता हैं।अहंकारी राजा, सेठ, सेठानी साधु और भिखारी की कहानी के माध्यम उपदेश को स्पष्ट समझाया। आज श्री जी, आचार्यों के चित्र समक्ष दीप प्रवज्जलन कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन, जिनवाणी भेंट कर अष्ट द्रव्यों से पूजन का सौभाग्य आर टी बोरदा परिवार को प्राप्त हुआ। रविवार को बालिकाओं की आत्म रक्षा के विशेष गुर सीख जयपुर की विशेष टीम द्वारा दी जावेगी

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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