मैं सागर इसलिए आया हूं कि मेरी बात सुनो सुधा सागर महाराज
सागर
निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधा सागर महाराज ने शनिवार को अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मैं सागर इसलिए आया हूं कि मेरी बात सुनो। मेरी बात को मानना जरूरी नहीं है।
उन्होंने कहा नियम लेना व नियम देना दोनों में बड़ा अंतर है। दिगंबर साधु में ऐसा आकर्षण होता है कि कोई ना कोई प्रभाव जरूर पड़ता है। साधु संगति से पाप में हल्कापन आ जाता है। कषाय में ढीलापन आ जाता है। सत्संग मात्र से ऐसी विशेषता होती है।
महाराज श्री ने सम्यक दर्शन की महानता को बताते हुए कहा कि सम्यक दर्शन इसलिए महान है क्योंकि इसी के बाद सम्यक दर्शन ज्ञान व सम्यक चारित्र को रखा गया है। सम्यक दर्शन महिमा को समझो। तुम्हें सम्यक दृष्टि नहीं बताऊंगा। लोग सोचते होंगे कि महाराज के पास जाएंगे तो वे नियम दिला देंगे, कलश दिला देंगे। यह डर तुम्हारे लिए हैं। इसीलिए मैं कहना चाहता हूं कि तुम्हारे लिए कोई नियम नहीं दिलाऊंगा। दान, अभिषेक के बारे में नहीं कहूंगा। साधु की बात भले न माने लेकिन मेरी बात को जरूर सुने।

उन्होंने आगे कहा कि क्रोध से सर्वनाश होता है यदि मुनि की कोई बुराई करनी हो तो सामने करो पीठ पीछे बुराई नहीं करना चाहिए मुनिराज की पीठ पीछे बुराई करना गलत है। सम्यक दृष्टि का मोक्ष जाना निश्चित है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
