जिंदगी के आंगन में हर खुशी कुंवारी है, किससे मांगने जाएं, यहां हर कोई भिखारी है पूर्णमति माताजी

धर्म

जिंदगी के आंगन में हर खुशी कुंवारी है, किससे मांगने जाएं, यहां हर कोई भिखारी है पूर्णमति माताजी
ग्वालियर
आर्यिका 105 पूर्णमति माताजी ने शुक्रवार की बेला में अपने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि जोड़ने के लिए मुहूर्त की जरूरत पड़ती है, छोड़ने के लिए नहीं। हमारे तीर्थंकरो ने बिना मुहूर्त के सब कुछ छोड़ा। संसार के पर द्रव्यों से जितना जुड़ोगे, उतना दुखी हो रहोगे। यदि जुड़ना ही है तो परमात्मा से एवं स्वयं की आत्मा से जुड़ों।

 

 

यह उदगार आर्यिका 105 पूर्णमति माताजी ने शुक्रवार की बेला में सिरोल चौराहा स्थित साक्षी एनक्लेव परिसर में धर्म सभा में मंगल प्रवचन देते हुए कही। माताजी ने कहा कि सुख और दुख मिलना तो हमारे स्वयं के कर्म सिद्धांत पर निर्भर होता है। जिंदगी के आंगन में हर खुशी कुंवारी है, किससे मांगने जाएं, यहां हर कोई भिखारी है।।

 

 

 

 

 

माताजी ने कहा सारी जिंदगी हम दुनिया भर की वस्तुओं को

 

 

एकत्रित करने में लगा देते हैं जबकि आत्मा का हित इन वस्तुओं के संग्रह में नहीं है। बल्कि त्याग में है। अधिकांश लोगों को अपने भविष्य की चिंता बनी रहती है, अरे वर्तमान को संभाल लो, भविष्य खुद व खुद संभल जाएगा। जैसा वर्तमान होगा, भविष्य भी वैसा ही होगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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