तीन “मकार” से रहें दूर ” मंच माइक और माला”विज्ञमति माताजी

धर्म

तीन “मकार” से रहें दूर ” मंच माइक और माला”विज्ञमति माताजी
एटा
ग्रीन गार्डन स्थित मां विशुद्धमती सभागार में गणधर वलय स्रोत के नौवे दिन प्रज्ञा पद्मिनी सेमिनार संयोजिका पट्ट गणिनी आर्यिका105 श्री विज्ञमती माता जी ने शिविरार्थियों को बताया कि गण को धारण करने वाले गणधर, अपनी समस्त इच्छाओं को समाप्त कर दिया है जिन्होंने, ऐसे ऋषिवर इन आठ ऋद्धियों को प्राप्त कर आपने पंचऔषधि ऋद्धियों कोऔर तीन बल ऋद्धि को प्राप्त कर लिया है पीड़ा आदि को हरने वाले जो मन बचन काय रिद्धि से युक्त हैं ऐसे ही परम ब्रह्म ईश्वर आपके गुणों की प्राप्ति हेतु में स्तुति करता हूं! आपने तो दिशाओं के अंबर को सुधार दिया आप स्व में स्थित रहकर पर का कल्याण करने में लगे हैं हमें मोक्ष का ग्राही बनना है तो स्व उपकार करो !देहधारी प्राणी विचारता है पहला सुख निरोगी काया,,पूर्वकृत कर्मों के उदय से अनेकों उपचारों के बाद भी जब आपको लाभ नहीं मिलता है आप रोग से पीड़ित लोगों के लिए विद्या बनकर आए हैं आपके चरणों के स्पर्श मात्र से उनके रोम रोम में असंख्य प्रदेशों में निरोगता की भावना आई थी वह कभी बीमार नहीं हुए बरन् शरण में आए रोगियों को रोग मुक्त कर दिया , ऐसे ऋद्धिधारी गणधर देवों की हम यहां स्तुति कर रहे हैं उन विश्व की समस्त औषधियों का अवलंबन जिन्होंने ले लिया है सभी राज वैधों से इलाज करने पर भी रोग ठीक होने में नहीं आ रहा है ऐसे उन गणधर प्रभु की भक्ति की औषधि से यह महान उदंबर कुष्ठ भी शांत हो जाता है! पीड़ा आदि को हरने वाले आमर्ष औषधि जल्ल औषधि और मल्ल औषधि के धारी है जिनके शरीर के नख, रोम, लार, मल मूत्र आदि की वायु के स्पर्श मात्र से असाध्य रोग दूर हो जाते है !,

 

जब सरस्वती मां और अरिहंत प्रभु की पूजा पूर्व दिशा उत्तर दिशा मुखी होकर करते हैं वह वीरवान, विद्वान होते हैं !जिन धर्म के अनुयायी को वक्ता कहा है जो सम्यक दर्शन के धर्म का सुलाभ करता है उसे “वक्ता” कहा है जो बके अनावश्यक बोले उसे “बकता” कहते हैं !माताजी ने बताया 6 प्रकार के लोग होते हैं ईर्ष्यालु, संतोषी, क्रोधी ,संदेही ,घृणा करने वाला और दूसरे के भाग्य पर जीवन बिताने वाले ,यह मनुष्य हमेशा रोते रहते हैं! सफल होना अच्छी बात है और अच्छा होना और भी अच्छी बात है प्रसिद्धि के लिए संविधान मत तोड़ना ,जो अपनी देहरी का का त्याग कर देता है वही ब्रह्मचर्य प्राप्त करता है ,तुम्हें अपने परमपिता जिनेंद्र प्रभु पर श्रद्धान ही नहीं है श्रद्धा को अमिट बनाएं आठ अंगों से युक्त बनाएं क्या कुदेव हमारा क्या भला कर पाएंगे उस विजातीय से हमारा क्या संबंध?उन्होंने कहा सत्यवादी के संग रहने से हम भी सत्य का मार्ग प्रशस्त कर लेते हैं और श्रद्धानी के साथ रहने से श्रद्धा की प्रतिमूर्ति बन जाते हैं !हमें जरा सा भी ज्ञान हो जाता है उस ज्ञान में हम कितना अर्नगल बोलते है बड़बोले बन जाते हैं अन्तरंग में कुछ भी नहीं उतारते,

 

 

 

जो माँ जिनवाणी कहती है वही करो, धन्य हैं वह मुनिराज मति, श्रुत अवधि ज्ञान के धारी, उनको सब पता है कालांतर में केवलज्ञान की प्राप्ति होगी फिर भी कुछ भी नहीं कहते हैं वह सदा मौन रहते हैं क्योंकि अभी ज्ञान की पूर्णता नहीं है! खोजी बनो उनकी तरह जो समुद्र की तह तक पहुंचता है और कभी खाली हाथ नहीं आता है

 

 

 

 

!उन्होंने श्रावकों को बताया कि तीन मकार “मंच माइक और माला” अगर इनका त्याग कर दें तो जीवन में हम सुखी रह सकते हैं! इस पूर्व दीप प्रज्वलन श्रीमान सुधाकर जैन श्रीमती बबीता जैन प्रेरणा, योगेश जैन आलोक जैन अमित मेडिकल, पंकज जैन, द्वारा किया गया, विशेष सहयोग के लिए श्री विनय जैन प्रतीश जैन,स्पर्श जैन को विशुद्ध भक्त परिवार द्वारा सम्मानित किया गया!आज सेमिनार में श्री योगेश जैन, नरेंद्र जैन, पंकज जैन, गजेन्द्र जैन, नितिन जैन, प्रदीप जैन, प्रभा चंद्र जैन, रोबिन जैन, सुनील जैन, प्रमोद जैन, संजू जैन, आशीष जैन, श्रीमती अनीता जैन, ममता जैन, रूबी जैन, शालिनी जैन, समीक्षा जैन, उषा जैन, बिंदु जैन, रितु जैन, खुशी जैन, दृष्टि जैन, अंशिका जैन, टिया जैन आदि शिविरार्थी उपस्थित थे!

जैन महिला संगठन की अध्यक्षा श्री मती बबिता जैन प्रेरणा ने बताया कि पिछले दस वर्षों से सोलह दिवसीय गणधर वलय स्रोत सेमिनार परम पूज्य माता जी के पावन सानिध्य में क्रमशः भिंडर, सुसनेर, बड़नगर, टोंक, निवाई, प्रताप नगर जयपुर, तलवंडी कोटा, श्री चमत्कार जी सवाई माधोपुर, मालपुरा, ग्वालियर और वर्तमान‌ में (एटा नगर )वर्षायोग के दौरान आयोजित किये गए जिनमें हजारों की संख्या में शिविरार्थियों ने प्रतिभाग कर अनेकों असाध्य रोग दूर कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया!

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *