यदि एक बार स्वयं का परिचय प्राप्त कर लिया होता तो फिर दूसरों का परिचय जानने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी नियमसागर महाराज

धर्म

यदि एक बार स्वयं का परिचय प्राप्त कर लिया होता तो फिर दूसरों का परिचय जानने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी नियमसागर महाराज
विदिशा
जिसको स्वयं का परिचय नहीं वह दूसरों का परिचय प्राप्त करने की कोशिश में लगा रहता है यदि एक बार स्वयं का परिचय प्राप्त कर लिया तो फिर दूसरों का परिचय जानने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।

 

 

उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108नियमसागर जी महाराज ने शीतलधाम विदिशा में व्यक्त किये। उन्होंने बहिरात्मा और अंतरात्मा की बात करते हुये कहा कि आत्मा दो प्रकार की है एक बहिरात्मा तथा दूसरी अंतरात्मा उन्होंने कहा कि जगत में जितने भी पदार्थ दिख रहे है उनको जानने का जो प्रयास करता है, वह बहिरात्मा है, और जो अपनी ओर दृष्टि कर अपनी आत्मा को जानता है वह अंतरात्मा है।

 

अंतरात्मा कहती है कि यह जो कुछ भी यह बाहरी धन संपदा या ठाठ बाठ दिख रहा है वह मेरी नही है,जो वस्तु मेरी नहीं है उसको देखकर मै क्या करूं? अरे जिस वस्तु को मै साथ नहीं ले जा सकता उस वस्तु का संग्रह में क्यों करुं?

 

 

 

 

मुनि श्री ने कहा कि बड़ा आदमी कौन? जिसने घूमने के लिये बड़ी बड़ी गाड़ी ली बढ़िया महल बनवाए वह लोग या जिनकी दृष्टि अपनी आत्मनिधी की ओर गयी वह लोग? उन्होंने कहा कि जिस संपत्ति को आप अपने साथ नहीं ले जा सकते वह आखिर बड़ा कैसे हो गया? उन्होंने कहा कि जिसको अपनी अंतरंग की संपत्ति का जब भान हो जाता है कि मैं क्या हूं, तो फिर यह बाहरी संपत्ति अंतरंग संपत्ति के सामने तुच्छ लगने लगती है। भगवान महावीर ने कहा कि संग्रह करने की प्रवृति अच्छी नहीं है।जो वस्तु आपकी अपनी नहीं है भले ही वह आपको पुण्य के उदय से प्राप्त हुई है फिर भी वह आपकी अपनी नहीं है उसका संग्रह मत करो,संसार में भी यही देखा जाता है कि जिसका स्वामित्व असली होता है उसी वस्तु को अपनी मानता है, किसी दूसरे की वस्तु पर अपना हक नहीं जमाता।

 

मुनि श्री भगवान शीतलनाथ के इतने भव्य समवसरण की तारीफ करते हुये कहा कि यह हजारों वर्ष तक जीवंत रहेगा इतना विशाल समवसरण तो हमें कही भी देखने को नहीं मिला।उन्होंने विदिशा के श्रावकों का उत्साह वर्धन करते हुये मंगल आशीर्वाद दिया। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया रविवार 4 अगस्त को जैन समाज द्वारा मुनिसंघ के चातुर्मास कलश की स्थापना का कार्यक्रम दोपहर डेढ़ बजे से शीतलधाम विदिशा में किया गया है जिसकी व्यापक तैयारियां की गयी है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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