आचार्य सन्मति सागर महाराज के अवतरण दिवस पर
गींगला मे हुआ मुख्य वेदी का शिलान्यास और दो जैनेश्वरी दीक्षाऐ
विभिन्न धार्मिक ग्रंथो का हुआ विमोचन

गिंगला।
चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य सुनील सागरजी महाराज के सानिध्य में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान सोमवार को तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर महाराज का अवतरण दिवस और आचार्य सुनील सागर जी महाराज का आचार्य पद आरोहण दिवस विविध धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया प्रातः आचार्य श्री के सानिध्य में श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुख्य वेदिका शिलान्यास हुआ मुख्य शिलान्यास रमेश कुमार जयंतीलाल मोहन लाल केलावत ने किया आचार्य आदिसागर शिला महावीर यश बंबोरिया परिवार सहित आठ दिशाओं की शिलाओ की स्थापना के साथ नवीन वेदी निर्माण की शिलाएँ स्थापित की गई। इस अवसर पर आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर महाराज कठोर तपस्वी संत थे। जिन्होंने अपने तपस्या जीवन में 10,000 उपवास किए । उनका त्याग और अनुशासनमय जीवन सभी के लिए प्रेरणा है। उन्होंने 150 से अधिक जैनेश्वरी दीक्षा देकर भव्यजनों का मोक्ष मार्ग प्रशस्त किया।
मुनि शुभम सागर महाराज ने भी प्रवचन किए। समारोह में आचार्य सुनील सागर जी महाराज द्वारा विरचित धार्मिक ग्रंथो का विमोचन हुआ । इस अवसर पर आदिसागर अंकलिकर जागृति मंच की राष्ट्रीय अध्यक्षा प्रेरणा शाह, विशाल कराडिया, काज ल गोवाड़िया, शांतिलाल गणावत रोशन केलावत, गोकलचंद मालवी, मोहनलाल मालवी ,लक्ष्मी लाल बंबोरिया, श्रेणिक भुता, कालूलाल ,रोशन लाल भोजावत मांगीलाल, झमक सोमावत झमक शेरावत सहित जावद जगत उथरदा गिंगला खरका उदयपुर बांसवाड़ा मुंगाणा नरवाली धरियावद भिंडर सहित कई स्थानों के श्रावक गण मौजूद थे।
दो जैनेश्वरी दिक्षाये सम्पन्न
प्रवक्ता अनिल स्वर्णकार ने बताया कि समारोह मे आचार्य सुनील सागर महाराज ने दो दीक्षार्थी मुंगाणा निवासी ब्रम्हचारिणी सूर्यकांता दीदी और नरवाली निवासी ब्रम्हचारिणी सुगंध दीदी को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान कर क्रमशः सूरजमति माताजी और सुगंधमति माताजी नवीन नामकरण किया।
