वीतरागी सर्वज्ञ हितोपदेशी भगवान में तीन लोक को जानने का ज्ञान होने से वह पूज्यता को प्राप्त होते हैं मुनि श्री हितेंद्र सागर जी
पारसोला। 
वर्षा में आप भीग रहे हैं वर्षा का और सीजन का हर आदमी इंतजार करता है। वर्षा नहीं होने,समय पर नहीं होने से सीजन खराब हो जाता है वर्षा से छांव ,शांति, कष्ट दूर होता है, आकांक्षा पूर्ण होती है। 8 माह की लंबी प्रतीक्षा के बाद वर्षा का इंतजार करते हैं क्योंकि
बरसात में अच्छी फसल होने से व्यापारी को उधारी की वसूली होती है चातुर्मास में साधु शरण में आने से पुण्य की प्राप्ति होती है क्योंकि चातुर्मास में ज्ञान की वर्षा में भीगने का अवसर मिलता है चातुर्मास में साधुओं के लिए चौका लगाना, आहार दान देना यह पुण्य में वृद्धि करता है ज्ञान रूपी धन भगवान, जिनवाणी से प्राप्त होता है ज्ञान से कष्ट दूर होते हैं ज्ञान ग्रहण करने योग्य है हमारे श्रावक को अपनी क्षमता की पहचान नहीं है सत्पुरुष समय पर ज्ञान की आराधना करते हैं ज्ञान आत्मा में ही है परोक्ष और अप्रत्यक्ष भेद वाला ज्ञान लोक और आलोक देखने वालों सत पुरुष नेत्रों से ज्ञान की स्तुति करते हैं छह द्रव्य से भरे लोक में आत्मा की पूज्यता है आत्मा में ज्ञान गुण नहीं होता तो आत्मा भी पत्थर होती। तीन लोक में वितरागी सर्वज्ञ हितोपदेशी भगवान को ज्ञान प्राप्त है और इसी कारण भगवान पूज्यता को प्राप्त है क्योंकि पूजा ज्ञान की ही होती है नमस्कार ज्ञान को ही किया जाता है द्रव्य क्षेत्र में नियमित बोघ पांच इंद्रियों के माध्यम से होता है मति ज्ञान से बोध प्राप्त होता है। यह मंगल देशना पारसोला नगर में विराजित मुनि ëश्री हितेंद्र सागर जी ने धर्म सभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया अनुसार मुनिश्री ने प्रवचन में आगे बताया कि ज्ञान सबके पास होता है भगवान, आचार्य परमेष्ठी ,साधु परमेष्ठी,आप सब में एक जैसा ज्ञान होता है। आचार्य परमेष्ठी अनेक प्रकार की तपस्या संयम से रिद्धि आदि प्राप्त करते हैं। रिद्धि मति ज्ञान की विशेषता है। ज्ञान से परिणाम शुद्ध होते हैं सभी की आत्मा में रिद्धि को, ज्ञान को प्रकट करने की क्षमता है सभी श्रावकों को स्वयं के लिए भी और साधु परमेष्ठी के लिए भी मर्यादित भोजन पानी उचित तरीके से छान कर आहार तैयार करना चाहिए मति ज्ञान से श्रुत ज्ञान की प्राप्ति होती है।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
