हाथ की नस में ब्लॉकेज थे, 100 ग्राम की पिच्छी भारी लगती थी, खुद पर प्रयोग किया, ठीक हुआ तब सिखाने लगा प्रमाणसागर महाराज भावनायोग पर विशेष जानकारी 

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 हाथ की नस में ब्लॉकेज थे, 100 ग्राम की पिच्छी भारी लगती थी, खुद पर प्रयोग किया, ठीक हुआ तब सिखाने लगा प्रमाणसागर महाराज भावनायोग पर विशेष जानकारी 

 सागर

जैन संत मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज इन दिनों राहतगढ़ में पंचकल्याणक महोत्सव में सान्निध्य प्रदान कर रहे हैं। वे भावनायोग के प्रणेता हैं। इसकी शुरुआत कैसे हुई, इसे लेकर उन्होंने विशेष बातचीत की। वे बताते हैं- मैंने अवचेतन मस्तिष्क से जुड़ी कुछ किताबें पढ़ीं। गहरा अध्ययन किया।इसके बाद पहले खुद पर भावना योग का एक प्रयोग किया।

 

  उन्होंने बताया कि मेरा दायां हाथ बाएं हाथ के मुकाबले बहुत पतला हो गया था। हाथ की नस में ब्लॉक थे। 100 ग्राम की पिच्छी भी मुझे भारी लगती थी। मैंने भावना योग में भुजा प्रवाह किया। छह महीने में मेरा हाथ ठीक हो गया। यह 2009 की बात है। इसके बाद से मैं रिसर्च करता रहा, भक्तों को ध्यान कराता रहा। 2018 में सोचा कि अब ध्यान नहीं योग कराते हैं। 7 साल में यह काफी लोकप्रिय हुआ और अब कई लोग इसे नियमित कर रहे हैं।भाव – ऊर्जा को जागृत करने वाला बना भावनायोग

धर्म से जुड़ा अभ्यास नहीं, लाइफ स्टाइल है

प्रमाणसागर जी कहते हैं- हम जैसी भावना रखते हैं वैसा ही हमारा जीवन होता है। भावना योग का मूल सिद्धांत यह है कि भाव जीवन को दिशा देते हैं। भारतीयदर्शन में वर्णित सोहम, शुद्धोहम और यथा भावती तथति जैसे सूत्र इसे आधार प्रदान करते हैं। पश्चिम जहां मुख्यतः भौतिकवादी दृष्टिकोण पर केंद्रित रहा,वहीं भारतीय परंपरा भाव और चेतना को जीवन का मूलहै। इसी भाव को जागृत करने के लिए भावनायोग विकसित हुआ।

यह किसी धर्म से जुड़ा अभ्यास नहीं, बल्कि लाइफ स्टाइल है। इसे चलते-फिरते, किसी भी समय किया जा सकता है।नियमित अभ्यास से प्रतिरक्षा क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।

अभ्यास से लोगों की डायलिसिस भी बंद हो गई

मुनिश्री ने बताया कोविड में हजारों लोग भावना योग से ठीक हुए। हॉस्पिटल में लोगों ने भावना योग किया, उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इन्युनिटी बढ़ी। बहुत से लोग मौत के मुंह से निकले। भावना योग से ठीक होने वाले सैकड़ों लोगों के वीडियो यूट्यूब पर हैं।  शारीरिक, मानसिक रूप से लाभ मिला। कैंसर की चौथी स्टेज पर, किडनी रोग में लोगों की डायलिसिस बंद हो गई।अब भावनायोग को और अधिक संगठित रूप देने की योजना है लगभग एक दशक से अधिक समय से भावनायोग की अवधारणा तेजी से उभर रही है।प्रोफेसर और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं केसहयोग से शुरू हुई यह यात्रा अब झारखंड,मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों में लोगों को प्रभावित कर रही है।

 

 

 

प्रमाणसागर जी बताते हैं- अब भावनायोग को अधिक संगठित रूप देने की योजना है। स्कूलों में ट्रेनिंग, एक्सपर्ट तैयार करना,डॉक्यूमेंट्री और साहित्य तैयार करना तथा संस्थानों में इसका नियमित अभ्यास शुरू कराना। उद्देश्य है। कि बच्चों और युवाओं में प्रारंभ से ही  भावनात्मक अनुशासन और मानसिक स्वास्थ्य की समझ विकसित हो।

         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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