सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुंसी में निर्विघ्न सम्पन्न हुआ चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ससंघ का
विज्ञातीर्थ गुंसी
राजस्थान की पावन एवं पवित्र भूमि श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ क्षेत्र, गुन्सी में प. पू. भारत गौरव पुरातत्व रक्षिका श्रमणी गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ का 30 वाँ विराग- विज्ञामय चातुर्मास 2024 का शुभारंभ 28 जुलाई 2024 को भव्य कलश स्थापना महोत्सव के साथ हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत श्री नेमीचंद जैन सपरिवार किशनगढ वालों ने ध्वजारोहण के साथ की। इसी के साथ दिशा, विदिशा के आठ लघु ध्वजारोहण भी भक्तगणों द्वारा संपादित हुए। जयकारों की ध्वनि के साथ ध्वजा फहराकर उत्तर दिशा की ओर प्रवाहमान हुई। गाजे बाजे के साथ आर्यिका संघ पांडाल पर पहुँचा। लगभग 50 गांवों के 3000 से भी अधिक श्रद्धालुओं ने महोत्सव का आनन्द लिया ।
प्रथम मुख्य सहस्रकूट कलश स्थापन करने का सौभाग्य निर्मल
सुधा बाझल सिवनी वालों ने प्राप्त किया। द्वितीय मुख्य सातिशय कलश स्थापन करने का सौभाग्य कंवरपाल जैन जयपुर वालों ने प्राप्त किया। तृतीय मुख्य तीर्थरक्षा कलश स्थापन करने का सौभाग्य सुनील जैन लोहा वाले जयपुर वालों ने प्राप्त किया।

चार अनुयोग कलश प्राप्त करने का अवसर धर्मीचंद कासलीवाल सेठी कॉलोनी , दीनदयाल जी सेठी कॉलोनी , सुरेश सेठी कॉलोनी जयपुर एवं राजेश त्रिवेणी नगर वालों ने प्राप्त किया ।
इसके अलावा अन्य 11 साधना कलश, 51 आराधना कलश एवं 108 चातुर्मास कलशों को स्थापित किया गया ।
पूज्य गुरु माँ के पावन चरणों का प्रक्षालन करने का अवसर राजेन्द्र जी जैन मंगल विहार जयपुर वालों ने प्राप्त किया । साथ ही अन्य भक्त परिवारों ने पूज्य गुरु माँ को शास्त्र भेंट , वस्त्र भेंट आदि कर पुण्यार्जन किया ।
पूज्य माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि – चातुर्मास का अर्थ है-चार मास के लिए साधु-साध्वियों का एक स्थान पर ठहरना। चातुर्मास का आरंभ वर्षा ऋतु में होता है। वर्षा के कारण सभी मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं और जीव-जंतुओं की उत्पत्ति भी बढ़ जाती है अत: जीवों की रक्षा और संयम -साधना के लिए चार मास तक साधु-साध्वियों को एक स्थान पर रुकने का शास्त्रीय विधान है। अपवाद स्वरूप ही साधु चातुर्मास में अन्यत्र जा सकते हैं।
अभिषेकजैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
