निस्पृही समताधारी आचार्य श्री के प्रवास तक रहा अदभुद अतिशय, त्रस जीव भी अन्यत्र जाकर निर्विघ्न साधना में बने सहभागी*
*विश्व विख्यात अतिशय तीर्थ क्षेत्र योगेंद्रगिरी सागवाड़ा जहा पर सन 2023 का पावन वर्षायोग सहित लगभग 17 माह तक स्वाध्याय तपस्वी आचार्य श्री कनकनंदी जी गुरुराज श्री संघ का मंगल प्रवास रहा,उस समय तीर्थ क्षेत्र समिति के लिए गंभीर चिंता का विषय था की हर साल वर्षाकाल का समय आते ही इस पूरे तीर्थ परिसर पर त्रस जीव गिजाई (गवल) का जमावड़ा हो जाता है,हर कक्ष,हर दीवाल पर इन गवलो की कतार लग जाती है। कक्ष के आस पास पैर रखने की भी जगह नहीं बचती।*
*ऐसे में तीर्थ क्षेत्र समिति इस विषय को लेकर काफी ज्यादा चिंतित थी ग्रीष्मकाल व शीतकाल तो अच्छा है किंतु वर्षाकाल में इस क्षेत्र पर साधना योग्य ,आहार,निहार व प्रवास कोई भी कार्य अत्यंत मुश्किल है।

किंतु आचार्य श्री कनकनंदी जी गुरुराज ने इसी क्षेत्र पर कांतार (एकांत क्षेत्र)वर्षायोग की घोषणा कर दी,जिससे समिति व समस्त भक्त जनों में चिंता थी आखिर कैसे होगा??
पूज्य गुरुदेव ने क्षेत्र समिति को कहा आप अपना कर्तव्य निभाए,हमारे लिए माँ जिनवाणी इस क्षेत्र पर स्थापित है सब अच्छा ही होगा।

और इस पूरे प्रवास में जिसमे सन 2023 का पूरा वर्षाकाल व इस वर्ष सन 2024 11 जुलाई तक के प्रवास में इन त्रस जीवो ने कही भी दस्तक नही दी, जैसे वे भी पूज्य आचार्य श्री संघ की कुशल साधना कराने हेतु सेवा भाव से अन्यत्र चले गए हो।ये सभी लोगो के लिए अत्यंत आश्चर्य था की हर वर्ष जहा इन जीवो का रेलमपेल लग जाता है वो इस वर्षाकाल में कही भी नजर नहीं आया। ये सब आचार्य श्री संघ की पवित्र साधना की ही महत्ता है।

और उसके पश्चात दिनांक 11 जुलाई की शाम को जैसे ही आचार्य श्री संघ का विहार इस पावन तीर्थ से हुआ उसके एक दिन बाद ही अकस्मात इन त्रस जीवों ने वापस अपना आधिपत्य जमा लिया।धन्य है दिगंबर महामुनि व धन्य है ऐसे मूक प्राणी*ल
शाह मधोक जैन चितरी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
