कोई इंसान कितना ही बड़ा व्यक्ति बन जाए, लेकिन उसको अहंकार नहीं करना चाहिए स्वस्तिभूषण माताजी
बूंदी
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि मोक्ष मुक्ति है, जहां त्याग आ जाए वही मोक्ष है। जन्म के बाद हमारा जीवन मृत्यु की तरफ जा रहा है। त्याग के बाद हमारा जीवन मोक्ष की तरफ जा रहा है। या हम बार-बार जन्म लेते हैं और मरते हैं, पर मोक्ष होने पर जीवन वाकई जीवन हो जाता है, इसीलिए मोक्ष चाहते हैं तो हमेशा मन में त्याग की भावना रखें हमेशा दूसरे लोगों का सहयोग करेंगे तो आपके दुख के समय मदद के लिए लोग आगे आएंगे।
पूज्य माताजी ने कहा कि इस दुनिया में व्यक्ति को मरने का भय है, बचपन में जवानी के बाद बुढ़ापे में कष्ट का भय है। धन इकट्ठा करने के बाद उसे चोरी का भय है। खाना खाने के बाद पेट खराब होने का भय है। कोई काम नहीं होने पर भी चिंता या भय है। सफल होने के बाद दुश्मनों से बचने का भय है। जब तक हम यह भय नहीं निकालेगे, हमारा जीवन सफल नहीं हो सकेगा।

माताजी ने कहा कि हमेशा अपने बच्चों को घरों से ही संस्कार देना शुरू करें। जो माता-पिता अपने बच्चों पर ध्यान नहीं देते हैं, वे संस्कारों के अभाव में गलत मार्ग पर चले जाते हैं। प्रत्येक माता-पिता को बच्चों को संस्कार देना चाहिए, बुजुर्गों का सानिध्य दिलाना चाहिए। माताजी ने कहा कि कोई इंसान कितना ही बड़ा व्यक्ति बन जाए, लेकिन उसको अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार इंसान को ऊंचाई से जमीन पर पटक देता है इसके बाद व्यक्ति को पछताने का मौका तक नहीं मिलता।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
