मुनि धर्म का पालन करके ही सिद्ध अवस्था तक पहुंचा जा सकता है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज
घाटोल पंचम पट्टाघीश वात्सल्य वारिघी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का पारसोला नगर में संयम जीवन का 56वा चातुर्मास हेतु मंगल विहार चल रहा है। आज प्रात काल आचार्य श्री का भव्य मंगल प्रवेश घाटोल नगर में हुआ,जहां पर पूर्व से विराजित आर्यिका श्री विज्ञानमति माताजी ने संघ सहित आचार्य श्री की अगवानी कर परिक्रमा लगाकर संघ सहित भक्ति वंदना की ।
स्मरणीय है कि आर्यिका श्री विज्ञान मति माताजी के ग्रहस्थ अवस्था के पिताजी ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से मुनि दीक्षा लेकर मुनि श्री यश सागर बन कर समाधि मरण किया था ।प्रातः कालीन सभा में आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि मिथ्यात्व हटाने पर ही सम्यक दर्शन प्राप्त होता है। मुनि धर्म धारण करके 14वें गुणस्थान तक पहुंचकर आगे शुक्ल ध्यान हटाने का पुरुषार्थ करना होता है। संसार में भ्रमण मिथ्यात्व के कारण होता है।
ब्रह्मचारी गज्जू भैया राजेश पंचोंलिया अनुसार आचार्य श्री ने प्रवचन में आगे बताया कि सभी श्रावको को भगवान बनने के लिए सर्वप्रथम मुनि व्रत धारण करना होगा ,परिणाम में बहुत अधिक निर्मलता लाने का पुरुषार्थ करना होगा। मुनि भी पुरुषार्थ कर छपक श्रेणी पर आरोहण करते हुए क्रम से कर्मों की निर्जरा करते हैं 14वें गुणस्थान तक मुनि पहुंचते हैं तब शुक्ल ध्यान शेष रहता है तब तप करने से कर्मों की निर्जरा होती है इसलिए सभी को नवीन कर्मों का आश्रव नहीं करना चाहिए कर्मों के कारण ही विपत्ति और दुख का कारण राग द्वेष होता है। सिद्ध भी पहले संसारी व्यक्ति होते हैं ।कर्मों की निर्जरा पुरुषार्थ से करना होगी आचार्य श्री ने इसे और स्पष्ट करते हुए एक डेम के माध्यम से बताया कि डेम बनाने से पानी का प्रभाव रुक जाता है किंतु पानी का स्तर ऊंचा हो जाता है पानी का रुकना संवर होता है ।इसी प्रकार आप को नवीन कर्मों का आश्रव रोक कर संवर करना होगा और पुरुषार्थ कर्मों की निर्जरा करने से आप सिद्धालय की राह पर आगे बढ़ सकते हैं। आचार्य श्री ने बताया कि अनादि काल से व्यक्ति संसारी प्राणी मिथ्यात्व से ग्रसित है उसे पुरुषार्थ कर सम्यक दर्शन प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। आप लोग सिद्ध चक्र मंडल विधान के माध्यम से पूजन कर रहे हैं। संसार भ्रमण अनादि काल से हो रहा है जिनवाणी हमें मुक्ति मार्ग बताती है आप लोग अनेक गतियों में घूम-घूम कर मोक्ष जाने की राह भूल गए हैं ।संसारी प्राणी भूल बढ़ाते जाता है, दर्शन, अभिषेक ,पूजा विधान से भूल सुधारने का अवसर मिलता है। मिथ्यात्व को हटाकर ही सम्यक दर्शन प्राप्त किया जा सकता है आचार्य श्री ने बताया किमिथ्यात्व हटाने के लिए देव शास्त्र गुरु के प्रति भक्ति निर्मल परिणाम गुणों से करना चाहिए इसके लिए परिणाम में विशुद्धता लाना चाहिए ।पूजन की मंगल आराधना से पापों का क्षय होता है कर्मों की निर्जरा होती है इसलिए सम्यक दर्शन आपका मजबूत रहना चाहिए उसमे श्रद्धा कम नहीं होना चाहिए । दर्शन पूजन सम्यक दर्शन प्राप्ति का कारण है आचार्य श्री संघ की 13 जुलाई की आहार चर्या खमेरा में होगी राजेश पचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312 
