बुंदेलखंड आचार्य विद्यासागर महाराज जी की तपस्थली है नियमसागर महाराज
रहली
बुंदेलखंड की पवित्र भूमि आचार्य श्री विद्यासागर जी की तपस्थली है जहां सबसे ज्यादा शिष्य मिले और गुरुदेव का गुरुकुल निर्माण हुआ, नव तीर्थ का निर्माण हुआ, ऐतिहासिकतीर्थो का जीर्णोद्धार हुआ। उपरोक्त उद्गार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित मुनि श्री नियम सागर महाराज ने रहली में धर्म सभा में भक्तों सेकहीं।
पूज्य मुनिश्री ने कहा की आचार्य श्री विद्यासागर जी के साथ सन 1978 में क्षुल्लक अवस्था में रहली आए थे आज 45 साल के बाद मुनि अवस्था में बड़े बाबा सहित सभी जिन देव के दर्शन करने एवं नव तीर्थ निर्माण देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मुनि श्री ने गढ़ाकोटा से रहली विहार करते समय एक शगुन की चर्चा करते हुए कहा कि तीन गाय एक साथ अपने बछड़ों को दुग्धपान करती हुई देखी थी जिसे हम सब ने देखा आप सब जानते हैं गुरुदेव ने पूरे भारतवर्ष की गौ रक्षा के लिए कितना कार्य किया है। सैकड़ो गौशाला संचालित कराई है। आचार्य श्री ने बुंदेलखंड को अपनी तपोभूमि बनाया और इस तपोभूमि में आपकी रहली से भी मुनि श्री कुंथुसागर जी, मुनिश्री निर्भीक सागर जी,आर्यिका मदुमती माताजी आदित्यमति माताजी,संभवमति माताजी, पवित्रमति माताजी पारमति माताजी एवम अनेक ब्रह्मचारी भैया और बहनों ने आचार्य श्री से एवं आचार्य श्री से दीक्षित मुनियों से व्रत लेकर मोक्ष
मार्ग को अंगीकार किया है।

मुनिश्री ने बताया कि 1978 में क्षुल्लक अवस्था में आया था और बड़े बाबा और पारस के दर्शन करते-करते मुनी बनने का विचार हुआ था और एक वर्ष बाद ही मेरी मुनि दीक्षा हो गई थी।उन्होंने कहा आने वाले समय में अतिशयक्षेत्र का नाम पूरे भारत में होगा मुझेविश्वास है की रहली में आगामी समय जैनेश्वरी दीक्षाएं होगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
