जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है प्रमाण सागर महाराज
आष्टा
परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने दिव्योदय तीर्थ पर अपने मंगल प्रवचन में कहा कि हम अपनी आत्म सुरक्षा से मुक्त नहीं हो रहे हैं। माया की गांठ बड़ी मजबूत बंधी हुई है। जिस पर अटूट विश्वास है। व्यक्ति दोहरा चारित्र रखता है तो वह दिल में रहने वाला व्यक्ति दिल से उतर जाता है। जिसको आप सब कुछ समझते हैं वह आपका नहीं है। सत्य का बोध होना चाहिए। जिसने जन्म लिया है, उसकी मौत निश्चित है। जन्म लेने वाले मरते हैं, लेकिन हम नहीं दूसरे मरते हैं। दुनिया भर की योजनाएं धरी की धरी रह जाती है।
महाराज जी ने कहा कि व्यक्ति को जीवन से मोह, मृत्यु से डरता है। मृत्यु कोई नहीं बच सकता है। जैसा करोगे ऐसा भरोगे, कुछ लेकर आए नहीं और ना ही लेकर जाएंगे। कोई हमारे नहीं है। मुट्ठी बांधकर आए और हाथ पसार कर जाओगे। दुनिया से एक दिन सभी को जाना है।

जब शरीर ही आपका नहीं
महाराज श्री ने कहा कि जब शरीर भी तुम्हारा नहीं तो परिवार कैसा। जीवो आत्म कल्याण के लिए। खुद का होकर जियो। मोह में जीने वाला अपनी अंतरात्मा को नहीं पहचान पाया है। व्यक्ति माला के पीछे नहीं माल के पीछे भाग रहा है।
प्रपंचों में ना उलझे
गुरुदेव ने कहा कि 36 गुण मिलाकर शादी करने वाले के आज 36 का आंकड़ा चल रहा। आज पहले जन्म पत्रिका बन रही, बच्चे बाद में जन्म ले रहे हैं। प्रपंचों में ना उलझे।
किसी की कमी एकांत में बताएं
महाराज श्री ने आगे कहा कि किसी की कमी सबके सामने न बताएं। उसकी अच्छाई के साथ कमी दिखाएं। जीवन हमारे निर्माण का साधन है, साध्य नहीं। व्यक्ति की पहचान चेहरे से नहीं चारित्र से होती है। आदमी के चारित्र को पहचान कर काम करें।
हर पल मृत्यु के लिए तैयार रहो
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि आज मैं आप सभी को मृत्यु का बोध करा रहा हूं, सच्चाई को सुनकर भी अनसुना क्यों कर रहे हो। दो दिन की जिंदगी, पलभर का सफर है। तय यह करो कि कैसे जाना है। मौत निश्चित है, पुण्य के सिंहासन पर सवार होकर जाना है या बेडियो में जकड़ कर, तय करो। हरपल मृत्यु के लिए तैयार रहो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
