-इस शरीर को जितना तपायोगे उतनी ही कर्मों की निर्जरा होगी. मुनिश्री
खुरई
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प्राचीन जैन मंदिर जी में विराजमान निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभव सागर जी महाराज ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को कभी भी मंदिरजी या तीर्थवंदना, धार्मिक कार्य आदि करते समय भौतिक सुख की चाहत नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति जितनी अधिक धर्म के कार्य करते समय अपने शरीर को तपायेगा उतनी ही उसकी कर्मों की निर्जरा होगी, उतना ही अधिक उसे पुण्यार्जन मिलेगा। धर्म-ध्यान,तीर्थ वंदना,धार्मिक-अनुष्ठान आदि करते समय “फाइव स्टार कल्चर” को अपनाना ठीक नहीं। मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति की सोच बहुत ही संकुचित होती जा रही है। व्यक्ति चमत्कार को ही धर्म समझ बैठा है।चमत्कार को नमस्कार करता है। फिर उसमें चाहे कितनी भी धोखा-फरेब ना हो! कितनी भी हाथ की सफाई विद्यमान हो। मुनि श्री ने कहा कि विडंबना यह है कि व्यक्ति मंदिर जी में भी आकर सम्मान की चाहत करता है। त्रिलोकीनाथ की शरण चाहिए या सम्मान यह भी विचार नहीं करता! श्री जी की शरण में जो आता है, उसे मन से बिल्कुल खाली हो कर आना चाहिए। जो व्यक्ति मन में अटूट श्रद्धा और समर्पण के भाव से भरकर आएगा वही कुछ पाएगा। जहां समर्पण है वही तो मोक्ष मार्ग है। मुनिश्री ने कहा कि हम मंदिर जी में भगवान के दर्शन करने आते है या दर्शन देने,इस पर विचार करना होगा! प्रवचन सभा में या तो कोई आता नहीं और आता है तो वह अपने मन मर्जी से आता है। ना ही उसे समय का ध्यान रहता है और ना ही अनुशासन की चिंता। हमारे कुछ सम्मानित व्यक्ति तो प्रथम पंक्ति में ही बैठना चाहते हैं, यह वीआईपी कल्चर हमारे जैन धर्म से बिल्कुल मेल नहीं खाता। धन-धान्य से परिपूर्ण व्यक्ति जितना सहज सरल एवं शांत होता है उतना ही उसको सम्मान अंतरंग से मिलता है। ऊपर से सम्मान तो कोई भी कहीं भी राह चलते भी कर लेता है। मुनिश्री ने कहा कि यदि हमें वास्तव में समाज, नगर, तहसील, जिला, प्रदेश या राष्ट्र में कुछ पाना है तो कुछ देना सीखना होगा। त्याग और समर्पण ही हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचा सकता है।प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की पूजन संपन्न हुई।बाहर से आए श्रद्धालुओं ने श्रीफल भेंट कर मुनि संघ से आशीर्वाद लिया। प्रवचन सभा का संचालन एवं संपादन अशोक शाकाहार ने किया। जेष्ठ मुनि श्री संभव सागर जी महाराज की आहार चर्या डॉक्टर पारस जैन के यहां संपन्न हुई। नगर एवं बाहर से आए अनेक श्रद्धालुओं ने मुनि श्री को आहार दान लेकर असीम पुण्यार्जन किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
