एक गाली – चार को साथ लेकर आती है..* *एक चिन्ता – सौ बिमारीयों को जन्म देती है.

धर्म

*अन्तर्मना उवाच* (27 जून!) एक गाली – चार को साथ लेकर आती है..*एक चिन्ता – सौ बिमारीयों को जन्म देती है.

*एक गाली – चार को साथ लेकर आती है..*
*एक चिन्ता – सौ बिमारीयों को जन्म देती है..!*

इसलिए करने दो बकवास, जो करते हैं। *खाली बर्तन और खाली दिमाग, हमेशा शोर करते हैं।* आज का आदमी चिन्तन में नहीं, चिन्ता में जी रहा है। इसलिए जीते जी मर रहा है।चिन्ता जहर है, इससे दूर रहिये। *चिन्ताओं से मुक्त होने के कुछ उपाय हैं, जैसे*

 

 

 

 


🔸 आप आपनी सारी चिन्ताओं को एक कागज पर लिखें और ध्यान से तीन बार पढे़ं और उस कागज को जला दें।
🔸 आप अपनी चिन्ताओं को अपने धोबी से, या बर्तन माजने वाली बाई से या कुम्हार से कह डालिये।
🔸 मन्दिर, मस्जिद, गुरूद्वारा या चर्च में जाकर अपने इष्ट आराध्य परमात्मा को सुना डालिये।

 

 

*श्री चरणों में सारी चिन्ताओं को डाल आइये।* आप महसूस करेंगे कि मैं हल्का हो गया हूँ। यदि चिन्ता तुम्हारे सिर बैठ गई तो फिर वह तुम्हें कभी खड़ा नहीं होने देगी।
इसलिए कहा –
*एक चिन्ता – सौ बिमारियों को लेकर आती है…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जेन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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