निर्यापक श्रमण मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ससंघ के चरणों में विदिशा की ओर से श्रीफल भेंट कर चातुर्मास हेतु निवेदन किया गया –
विदिशा
ः संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महा मुनिराज के शिष्य एवं आचार्य समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री वीरसागर जी महाराज का मंगलविहार विदिशा चातुर्मास हेतु कुन्डलपुर से विदिशा की ओर चल रहा है।
प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मुनि श्री वीरसागर जी महाराज की विदिशा नगर में मंगल अगवानी 26 जून तक सम्भावित हो सकती है।श्री जैन ने बताया मुनि श्री वीरसागर जी महाराज आचार्य श्री की आज्ञानुसार पृथक संघ के रुप में पहली बार फरवरी 2014 में रामटेक से विदिशा आऐ थे तथा लगातार चार माह तक धर्म प्रभावना कर महावीर जयंती कर विहार किया था।

उनके चरण ऐसे पड़े कि उनके जाने के तुरंत बाद 2014 में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के चरण रामटेक से विदिशा की ओर बड़े और विदिशा वासियों को चातुर्मास मिला, दस साल उपरांत सन् 2024 में पुनः आगमन कुन्डलपुर से नवाचार्यश्री समय सागर जी महाराज की आज्ञा से पहली बार विदिशा के लिये हुआ है, यह विदिशा वालो का सौभाग्य ही है,कि गुरूदेव का आशीर्वाद विदिशा नगर में चातुर्मास के रुप में फलित होंने जा रहा है। शनिवार को विदिशा नगर से बस एवं कारों के माध्यम से बड़ी संख्या में श्रद्धालु राहतगढ़ पहुंचे एवं प्रवचन के पूर्व सामुहिक रूप से श्रीफल अर्पित कर विदिशा पधारने का निवेदन किया।इस अवसर पर सकल दि.जैन समाज समिति, श्री शीतल विहार न्यास समिति, समग्र पाठशाला समिति, मुनिसेवक संघ सहित, विदिशा नगर के समस्त महिला मंडल ने श्री फल अर्पित कर विदिशा की ओर मंगल विहार करने का निवेदन किया।
इस अवसर पर मुनि श्री ने विदिशा नगर के समस्त श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुये कहा कि “भक्त के वश में भगवान होते है”उन्होंने भगवान महावीर और चंदनबाला की भक्ती की कथा सुनाते हुये कहा कि यह “चंदनवाला” की भक्ति ही थी जो सांकलो से जकड़ी होंने के बाबजूद भी भगवान महावीर का पड़गाहन कर आहार दान दिया था। मुनि श्री ने कहा कि “समर्पण” के आगे तो भगवान को भी झुकना पड़ा था,उन्होंने कहा कि ये चमक ये दमक ये महक जो आपको मिली है वह आचार्य गुरुदेव के आशीर्वाद से ही मिली है, उन्होंने हमेशा दौनों हाथ से विदिशा वासियों को दिया है। यह आप सभी लोगों की जिम्मेदारी है, कि जो आशीर्वाद गुरूदेव का मिला उसको आप कितने समर्पण के साथ पूर्ण करते हो, जिधर भक्तों का समर्पण होता है,गुरु के चरण तो वंहीं रुक जाते है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
