पेट भी एक मशीन है और यह भी थक जाता है इसको भी एक दिन का आराम मिलना चाहिए! स्वस्तिभूषण माताजी

धर्म

पेट भी एक मशीन है और यह भी थक जाता है इसको भी एक दिन का आराम मिलना चाहिए! स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में पर्व का महत्व बतायाए और कहा की पर्व में किया गया दान का विशेष महत्व होता है।

 

 

विस्तृत रूप से बताया की पर्व क्या है? दश लक्षण पर्व अष्टानिका पर्व सोलह कारण पर्व अष्टमी पर्व चतुर्दशी पर्व! ये पर्व हैं! गन्ना देखा है! गन्ने में जो गांठ होती है उसको भी पर्व कहते हैं! और जितनी ताकत उस गन्ने में है उससे अधिक उसकी गांठ में होती है! गांठ के माध्यम से ही खेती करके गन्ने को उगाया जाता है! जैसे किसी धागे में बहुत से गांठे लगा दी जाएं तो उसको तोड़ना मुश्किल होगा! कहने का तात्पर्य है कि गांठ सामान्य धागे से अधिक मजबूत होती है! ऐसे ही पर्व के दिनों में किया हुआ धर्म दान पुण्य आदि सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक फलदायी होता है! आप सामान्य दिनों में पूजा करो उसका फल एक है आप अष्टानिका पर्व में पूजन करो उसका फल चार है! आप सामान्यतया रात्रि भोजन त्याग करो फल एक है आप पर्वों में रात्रि भोजन त्याग करो फल चार हैं! पुण्य का फल चार है तो पाप का फल भी चार है! आप अन्य दिनों में रात्रि भोजन करोगे पाप एक लगेगा लेकिन पर्व के दिनों में रात्रि भोजन करोगे पाप चार लगेंगे! इसलिए अष्टमी चतुर्दशी को रात्रि भोजन का त्याग तो सभी का होना ही चाहिए! काम बिगड़ते है तो पाप के कारण से! और काम बनते हैं तो पुण्य के प्रभाव से! अगर अष्टमी चतुर्दशी को आपने रात्रि भोजन का त्याग किया तो पुण्य आया! अब पुण्य के प्रभाव से आपका जो काम नहीं भी हो रहा होगा वह भी सफल हो जायेगा और आपको पता भी नहीं चलेगा यह कहां से हो गया! और यदि पाप करोगे तो कहीं न कहीं बाधा तो आयेगी ही! इसलिए पर्व के दिनों में पाप के कार्य छोड़ देते हैं!

 

 

 

 

 

 

वैसे तो गृहस्थी है सामान्य पाप तो होते हैं लेकिन पर्व के दिनों में सावधानी वर्तनी चाहिए कम से कम अष्टानिका दशलक्षण पर्व में तो पापों से बचना चाहिए क्योंकि पर्वों में पाप का फल चार गुणा अधिक होता है पर्व तो पापों के प्रक्षालन के लिए आते हैं! अष्टमी चतुर्दशी को प्रोषध करना चाहिए! प्रोषध का अर्थ है सप्तमी को एकाशन करके सभी आहार आदि का त्याग करके अष्टमी को उपवास नवमी को एकाशन करना प्रोषध है! जो चार शिक्षाव्रत है सामायिक प्रोषधोपवास भोगोपभोग परिमाण व्रत और अतिथि संविभाग! हमे अष्टमी और चतुर्दशी को उपवास करना ही चाहिए! जैसे हम जॉब करते हैं 6 दिनों तक काम करते रहने से हमारा दिमाग थक जाता है तो एक दिन का आराम मिलता है! वैसे ही पेट भी एक मशीन है और यह भी थक जाता है इसको भी एक दिन का आराम मिलना चाहिए! इससे हमारी शरीर रूपी मशीन ठीक रहेगी!

चेतन जैन केशवरायपाटन से प्राप्त जानकारी अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312टी

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