अन्तर्मना उवाच* (20 जून!)

धर्म

अन्तर्मना उवाच* (20 जून!)

*धरती पर रहता इंसान दौलत गिनता है, कल कितनी थी, आज कितनी बढ़ गई–?* ऊपर से ये सब देखकर परमात्मा हँसता है और इंसान कि साँसे गिनता है — कल कितनी थी, आज कितनी कम रह गई है साँसे। फिर भी *इंसान बे खबर होकर जिन्दगी जी रहा है।* तन के पिंजरे से प्राण पखेरू कब उड़ जाये क्या पता -? इसलिए *जीवन में जो काम करने जैसा हो उसे अविलम्ब कर लेना चाहिए।*

 

 

 

 

जो शुभ है, धर्म है, मंगल है, उसे करने में आलस प्रमाद नहीं करना चाहिए। *जो पुण्य है, कल्याण है, सेवा है, उसे करने में टाल-मटोल नहीं करना चाहिए*। शुभ, मंगल, श्रेष्ठ, पुण्य, सेवा कार्य को कल-परसों पर मत टालना यानि स्वयं पर एक आत्म घाती कदम होगा। इसलिए *धर्म ध्यान, दान पूजा, तपश्चरण आज अभी इसी वक्त कर लेना चाहिए।* और अशुभ को, पाप को, गलत को, कल पर छोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से दिन सब वो करना जो अभी तक नहीं हुआ…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *