माता मरूदेवी की गोद भराई में उमड़ा महिला शक्ति का हजूम





कुंडलपुर (दमोह)।
मप्र के प्रसिद्ध जैन तीर्थ कुंडलपुर का वातावरण धर्ममय बना हुआ है। यहाँ हो रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन महाराजा नाभिराय का दरबार सजा। जिसमें तीर्थंकर बालक के गर्भ में आते ही कुबेर ने पूरे पांडाल में रत्नों की वर्षा की।
मध्यान की बेला में तीर्थंकर बालक की माता मरूदेवी की गोद भराई हुई। जिसमें बड़ी संख्या महिला शक्ति शामिल हुई।
एक लोकोक्ति
ऐसी लोकोक्ति कही गयी है कि जो महिला पंचकल्याणक में माता मरूदेवी की गोद भरती है, उसकी गोद खाली नहीं रहती। महोत्सव में सुबह मुनि श्री प्रणम्यसागर जी महाराज के प्रवचन भी हुए।
सवा लाख वर्ग फीट का पाण्डाल छोटा पड़ा।
गुरुवार को पचास हजार से अधिक लोग महोत्सव में पहुंचे। सवा लाख वर्ग फीट में बना विशाल पांडाल दूसरे दिन ही छोटा पड़ गया।
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के पावन सान्निध्य में पंचकल्याणक महोत्सव की धार्मिक क्रियायें प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया के निर्देशन में सम्पन्न हो रही हैं। गुरुवार सुबह भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्य पूजन एवं गर्भ कल्याणक की पूजन की गई।
स्वयं के साथ जगत के कल्याण के तीर्थंकर भगवान का जन्म होता है प्रणम्य सागर जी
इस अवसर पर मुनिश्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने कहा कि स्वयं के साथ साथ जगत के कल्याणक के लिये तीर्थंकर भगवान का जन्म होता है। उन्होंने कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के काल में हुआ। हमें आचार्यश्री का शिष्य बनने का अवसर मिला है, और आप सभी को आचार्यश्री का भक्त होने का गौरव मिला है।मुनिश्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने कहा कि उन्होंने आचार्यश्री को पहली बार सपने में देखा था। तब के मित्र वर्तमान के मुनिश्री अभिनन्दन सागर जी महाराज ने आचार्यश्री का चित्र दिखाया तो चौंक गया कि यही तो सपने में आये थे। तभी तय कर लिया कि आचार्यश्री के दर्शन करने जाऊंगा तो फिर घर नहीं आऊंगा। आचार्यश्री ने मेरी भावना को समझा और मुझे दीक्षा देकर मेरे ऊपर सबसे बड़ा उपकार किया है।
सादें का जुलूस और गोद भराई
कुंडलपुर पंचकल्याणक में पहली बार भगवान के 24 माता पिता बनाये गये हैं। गुरुवार को दोपहर में 24 माताओं का सादें का जुलूस निकाला गया। इसके बाद मुख्य पांडाल में 24 सिंहासनों पर माता मरूदेवी को बिठाकर उनकी गोद भराई की रस्म की गई। हजार महिलाओं ने नारियल के गोले, मखाने अगर ड्रायफ्रूट से माता की गोद भराई की। महोत्सव के मुख्य पात्रों व इन्द्र इंद्राणी के बाद आम महिलाओं ने गोद भराई की। इस अवसर पर पूरा पांडाल महाराजा नाभिराय और माता मरूदेवी के जयकारों से गूंजता रहा।
गुरु को यादकर आचार्य श्री भावुक
मध्यांन की बेला में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज अपने गुरु आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज को स्मृति में लाते हुए भावुक हो गये।
उन्होंने कहा कि- “गुरु ने, गुरु समय दिया, लघु बनने के लिये।” अब ऐसा लगने लगा है कि भगवान के चरणों में बैठा हूं और भगवान आशीष दे रहे हैं। बस यह स्मरण सदैव बना रहे।
महज 8 मिनट का उदबोधन
आचार्यश्री महज 8 मिनट बोले, लेकिन वह बहुत भावुक थे, इस कारण उनके शब्द ठीक से नहीं निकल पाए थे। दोपहर की धर्मसभा में मुनिश्री वीरसागर जी महाराज ने भी प्रवचन दिये।
सकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
