समता भाव लाने के लिए बहुत अधिक पुरुषार्थ की आवश्यकता होती है स्वस्तिभूषण माताजी

धर्म

समता भाव लाने के लिए बहुत अधिक पुरुषार्थ की आवश्यकता होती है स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने समता भाव धारण करने की सीख दी पूज्य माताजी ने कहा कि
सामायिक करने में समता भाव होना जरूरी है! और समता भाव लाने के लिए बहुत अधिक पुरुषार्थ की आवश्यकता है!

 

 

उन्होंने कहा टेडी लाईन खींचना सरल है या सीधी लाईन खींचना सरल है? टेडी लाईन खींचना सरल है! एक टेडी लाईन खींचना हो तो एक बच्चा भी खींच देगा! लेकिन यदि सीधी लाईन खींचना हो तो बड़े स्थिर होकर स्केल आदि की मदद से खींचना पड़ेगा!

 

सिद्ध पूजन में एक लाईन लिखी है “सीधा सरल है मुक्ति जाना कठिन यह संसार है, निज धर्म तो है सरल किन्तु कठिन मायाचार है!” सीधा होना सरल है लेकिन संसार में सीधा होना कठिन है! सीधा होना मतलब कषायो से रहित होना! लोग सीधी सड़क पर भी टेढ़े मेढे चलते हैं! अगर टेढ़ी सड़क पर सीधा चलना आ जाए तो बहुत बड़ी बात है! अगर व्यक्ति शोक में है तो वह सामायिक नही कर पायेगा! अगर वह सामायिक में बैठ भी गया तो मन में विचार शोक के आते रहेंगे! जो चीज हमसे चली गई है जो वापिस नही

 

 

 

मिलेगी उसकी जो स्मृति है वह शोक है! शोक में अशुभ कर्म का बंध होता है पाप कर्म का बंध होता है! हमारी दुर्गति होती है! आर्त ध्यान होता है! और तिर्यंच गति की प्राप्ति होती है! सुकमाल मुनि की मां ने गृहस्थ अवस्था में कितने प्रयत्न किए कि बेटा मुनि ना बन जाए! क्योंकि मुनिराज ने बताया था कि जिस दिन तुम्हारा बेटा किसी मुनिराज के दर्शन करेगा उस दिन वह दीक्षा ले लेगा! मां ने ऐसा बंदोबस्त किया कि बेटे को मुनि के दर्शन ना हो पाएं! लेकिन कर्म का लिखा कौन टाल सकता है! मां ने चारों तरफ सिपाही खड़े कर दिए बाढ़ लगवा दी! लेकिन सुकमाल ने छत पर से देखा कि यह नग्न मुद्रा में कौन खड़ा है! पता चला कि वह दिगंबर साधु हैं और गृहस्थ अवस्था के उनके पिता भी हैं सुलमाल को तुरंत वैराग्य उत्पन्न हो गया और मुनि बन गए!

 

इधर बेटे के मुनि बनने से मां दुखी होकर आर्त ध्यान करते करते मर कर तिर्यंच गति में शेरनी बनी! इसलिए जो वस्तु चली गई है उसके शोक में अपनी गति नही बिगाड़नी चाहिए! ये संसार है यहां आना जाना चलता रहता है! आए हैं तो एक दिन सबको जाना पड़ेगा! ये प्रकृति का नियम है!

 

! काले व्यक्ति को देखकर उससे ग्लानि करना! ऐसा करना कषाय है और इससे पाप का बंध होता है! घर में बड़े बुजुर्ग हैं इनको देखकर ग्लानि नहीं करना! मुनियों को देखकर ग्लानि नहीं करना चाहिए!

चेतन जैन केशव राय पाटन से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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