विनय आध्यात्मिक संविधान वैश्विक संविधान है आचार्य कनकनदी गुरुदेव

धर्म

विनय आध्यात्मिक संविधान वैश्विक संविधान है आचार्य कनकनदी गुरुदेव
सागवाड़ा
अभिनव श्रुत केवली वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नदी गुरुदेव ने योगेंद्र गिरी से अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि विनय आध्यात्मिक संविधान वैश्विक संविधान हैl

 

 

 

चतुर्विध संघ को आचार्य दंडित करते हैं अनुशासित करते हैंl यह न्याय प्रक्रिया को प्रकाशित करता है जिससे आत्म शुद्धी होती हैl आध्यात्मिक न्याय प्रक्रिया में दोष दूर करने के लिए प्रायश्चित दिया जाता है जिसे दंड कहते हैंl लौकिक व्यवहार में दंड देने वाले को पुरस्कार मिलता है जैसे जज l आध्यात्मिक प्रक्रिया में प्रायश्चित से आत्मा की शुद्धि होती है ।

 

 

विनय से आत्म शुद्धि होती है। जहा विनय है वहां द्वंद नहीं होता विनय से कलह भी नहीं होता l विनय से रिजु भाव आर्जव भाव प्रकट होता है विनय से स्वस्थ होते हैं स्वयं में स्थित होना स्वस्थ है विनय से भोलापन रहता है मृदु भावी होता है विनय से लघुता का भाव परिग्रह त्याग का भाव प्रकट होता है परिग्रह त्याग से हल्के हो जाते हैं किसी प्रकार का टेंशन नहीं रहता है पढ़ाई राजनीति व्यापार नौकरी सब लोभ के कारण करते हैं लोभ मोह प्रपंच रहते हुए हल्का अनुभव नहीं कर सकते हैं।

 

 

 

 

महाराज श्री ने कहा जिनेंद्र भक्ति गुरु भक्ति गुरु सेवा नहीं करते हैं वह विनयवान नहीं है गुरुदेव पढ़ाते हैं उस विषय को लिखते हैं उतना अधिक याद रहता है क्योंकि इससे ब्रेन केंद्रित रहता है मन केंद्रित रहता है स्वस्थ रहता है गुरुदेव आनंद की खान है जिसको आनंद लेना है गुरुदेव के पास जाना चाहिए विनयवान हमेशा आल्हादित रहता है।

महाराज श्री ने आगे कहा की विनयविनयसंपन्नता की पूजा विनय का विनय है मार्दव भाव की पूजाभी विनय का विनय है मूर्ति पूजा द्रव्य पूजा सोलह कारण पूजा सब में मूल भाव पूजा है।विजयलक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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