आचार्य श्री विरागसागर महाराज के अंतिम दर्शन हमारे लिए स्मृति बन गए मनोज जैन बाकलीवाल
प्राणी मात्र के लिए कल्याणकारी वाणी देने वाले संत एवम अनेक युवाओं को दीक्षा देकर मोक्ष मार्ग पर प्रशस्त करने वाले संत आचार्य आज समाधिस्थ हो गए उनकी निर्मोहीता, पंचम युग में एक अनुकरणीय उदाहरण थी। जो भी इनके दर्शन करता बस इन्हीं का हो जाता था।
संतो के लिए समर्पित श्री मनोज जैन बाकलीवाल ने बुधवार की अनुपम बेला में गुरुवार के दर्शन किए एवं उन्हें आहार देने का सौभाग्य प्राप्त किया स उन्होंने उन पलों को सभी के बीच सांझा किया और बताया कि कल दोपहर तक तो हम महाराष्ट्र के जालना के बाहर एक फार्म मे विराजित गणाचार्य विरागसागर जी महाराज के पास ही थे, सब कुछ लगभग ठीक ही लग रहा था, पूज्य श्री परसों यकायक अस्वस्थ हो गये थे, उपयुक्त इलाज चालू हो गया था, हमें भी उनके आशीर्वाद व वैयाव्रती का अवसर मिल रहा था, कल सुबह हम उन 3-4 सौभाग्यशालीयों में से थे जिन्हे महाराज जी को आहार दान कराने का भी मौका मिला था, वे धीरे धीरे स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे!
उन्होंने बताया कि सब कुछ ठीक ठाक जान हम उनका आशीर्वाद ले, संघ के दर्शन कर रात्री औरंगाबाद से फ्लाइट ले दिल्ली पहुंचे और लगभग रात्री के 2.30 बजे आगरा अपने घर पहुंचे ही थे कि थोडी देर मे ही जालना से समाचार आया कि आचार्य श्री की समाधी होगयी, एकबार तो विश्वास ही नहीं हुआ, दोबारा जालना के परिचितों को फोन कीया, यो पाया समाचार सही है! अत्यन्त दुख के क्षण थे व अफसोस भी कि काश आज और रुक जाते!

खैर अब गणाचार्य विरागसागर जी महाराज अब हमारे बीच नहीं हैं, परन्तु अगर सामने है, तो उनका तप, ज्ञान व उनके द्वारा दीक्षित लगभग 500 मुनी, आर्यिका और उनके द्रारा बनाये पूज्य
विशुद्धसागर जी समेत 9 आचार्य! अनके द्रारा प्रद्त यह अन्तिम आशीर्वाद भी अब चिर स्मृति बन गया!
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
