जो परमात्मा को याद करें वह पुण्यात्मा है…..आचार्य प्रज्ञासागर
शुजालपुर
मृत्यु के समय जिसे परिवार याद आएँ वह पापी,और जिसे परमात्मा याद आएँ वह पुण्यात्मा है।यह बात मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि पुण्यात्मा ही समाधि की भावना रखता है।अर्थात पुण्यात्मा की समाधि होती है पापी तो सिर्फ मरता है।आचार्य वीरसेन स्वामी कहते है, जिसे मृत्यु के समय णमोकार मन्त्र याद रहता है वह सम्यकदृष्टि और जो भूल जाएं वह मिथ्यादृष्टि है।
उक्त विचार तपोभूमि प्रणेता प्रज्ञासागर महाराज ने धर्मरत्नाकर जी के सल्लेखना प्रकरण के अन्तर्गत एक गाथा की व्याख्या करते हुए शुजालपुर में उपस्थित जनसमूह के समक्ष व्यक्त किये।
उन्होंने कहा जीवन में धन कमाकर लोग धनवान बन जाते है, पढ़ लिखकर विद्वान बन जाते है लेकिन थोड़े से लोग होते है जो भगवान की पूजा और गुरुओं की सेवा करके पुण्यवान बनते है।जो पुण्यवान होते है वे पुण्य के प्रभाव से अरहन्त की अवस्था को प्राप्त करते है ऐसा आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी प्रवचनसार जी में कहते है।
मौसम आज ठंडा रहा लेकिन फिर भी सुनने वाले लोग मौसम की परवाह किये बिना आये और सभी ने धर्मलाभ लिया।
शाम को आनंदयात्रा करवाते हुए महाराज श्री ने दिनचर्या कैसी होनी चाहिए यह बतलाया उन्होंने कहा-सुबह उठकर णमोकार मन्त्र का नौ बार जप करें फिर दर्पण में अपना चेहरा देंखे।फिर सीधा पैर जमीन में रखते हुए बिस्तर छोड़े।ऐसी हमारे पूर्वाचार्यो की आज्ञा है।इस विषय को विस्तार से समझाते हुए बहुत सारी बातें बताई।बाद में सही जवाब देने वाले श्रीमती रुचि जैन आष्ठा, श्री सुधीर जैन राजगढ़ और श्रीमती आशा जैन शुजालपुर मंडी को समाज की ओर पुरस्कार प्रदान किये गए।आरती के साथ कार्यक्रम पूर्ण हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
