इतिहास पढ़ना सरल है, लेकिन इतिहास लिखना कठिन है आदित्य सागर महाराज

धर्म

इतिहास पढ़ना सरल है, लेकिन इतिहास लिखना कठिन है आदित्य सागर महाराज
केकड़ी
परम पूज्य मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन के द्वारा बताया कि हमारे जाने के बाद यदि कोई हमें जिंदा रखता है, तो वह हमारा नाम है। इतिहास पढ़ना सरल है, लेकिन इतिहास लिखना कठिन है। दुनिया की रूढ़ियों से हटकर चलने वाले ही इतिहास लिख पाते है। इसीलिए 4 गुना मेहनत, 10 गुना त्याग, व सौ गुना सहना पड़ता है।

 

 

महाराज श्री ने कहा कि जो लोग रूढ़ियों पर चलते हैं वे केवल इतिहास पढ़ते हैं। और जो रूढ़ियों को तोड़ते हैं वह इतिहास लिखते हैं। रूढ़िया हमें डरपोक बनाती है।

 

यदि हमें जीवन में उन्नति करना है तो, अपने नजरिए को प्रारंभ से ही स्पष्ट करना चाहिए। अपना कार्य, अपनी रुचि के अनुसार ही निर्धारित करना चाहिए। उत्कृष्ट समाधि उसी की होगी, जिसने अपने जीवन पथ पर न्याय मार्ग को अंगीकार किया हो। 

 

इस अवसर पर अप्रतिम सागर महाराज ने अपनी वाणी से कृतार्थ

 

 

करते हुए कहा कि जब संसार में प्राणी जन्म लेता है तो वह रोता है, मगर परिवार व संसार हंसता है। प्रसन्न होता है। पर जीवन तभी सार्थक है, जीवन के अंतिम समय में आप हंसते हैं और जग रोए। काम ऐसा करें कि नाम हो जाए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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