कुडलपुर मुख्य कार्यकर्मो की हुई शुरुआत
कुंडलपुर महा महोत्सव में मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत हो गयी। विगत दिनों में कुण्डलपुर महा महोत्सव में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री एवं महामहोत्सव के प्रभारी मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा द्वारा दिए गए बयानों का व्यापक असर देखा जाएगा। कोई भी वाहन मुख्य द्वार से भीतर प्रवेश नहीं करेगा, चाहे वह कितना भी वीआईपी हो, कुंडलपुर मुख्य द्वार से प्रत्येक व्यक्ति को परिसर तक पैदल ही जाना पड़ेगा। इस हेतु यातायात समिति ने अपनी व्यवस्था और भी चौकस कर दी हैं। बड़े बाबा मंदिर आने जाने हेतु यात्री बसों का इंतजाम किया गया है, मुख्य पंडाल के आसपास कोई भी वाहन खड़ा न हो इस हेतु यातायात समिति ने व्यवस्थाओं को और भी मजबूत कर दिया है। यातायात समिति के प्रभारी सोनू जैन ने बताया कि कोई भी वीआईपी वाहन मुख्य पंडाल से बाहर बनाई गई पार्किंग व्यवस्था के अंतर्गत ही खड़ा किया जायेगा। यातायात समिति के अमित त्यागी मुकेश जैन, रानू जैन जबलपुर, अंकुर सराफ, विक्रांत सराफ अपनी सेवायें दे रहे हैं। मीडिया समिति के सदस्य मानव बजाज ने जानकारी प्राप्त कर बताया कि महामहोत्सव की स्वयं सेवक समिति के अंतर्गत करीब 1200 स्वयं सेवक पूरे महोत्सव में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, स्वयंसेवक समिति के प्रभारी गिरीश नायक ने बताया कि सांगली से 400 स्वयं सेवक अपनी सेवाएं देने कुंडलपुर में मौजूद हैं। इसके अलावा करीब 1200 स्वयंसेवक दमोह जिले के इस महोत्सव में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। समिति के अमरदीप जैन लालू, चक्रेश जैन, जीतू जैन, विवेक राम जैन, सहित सैंकड़ों स्वयंसेवक यहाँ रहकर दिन-रात अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

संतोष सिंघई श्रीमन्त की उपाधि से विभूषित
प्रिन्ट मीडिया के सह प्रभारी जय कुमार जलज ने बताया कि कुण्डलपुर कमेटी अध्यक्ष संतोष सिंघई, सुशीला सिंघई को सुपार्शनाथ भगवान के माता पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। और अपार श्रद्धालुओ के मध्य उन्हें श्रीमंत की उपाधि से विभूषित किया गया। अब वो श्रीमंत संतोष सिंघई के नाम से जाने जायेंगे। संस्कार बिगड़ जाने पर भाव बिगड़ जाते हैं~आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
विश्व प्रसिद्ध जैन सिद्ध क्षेत्र कुण्डलपुर में इस शताब्दी के सबसे बड़े जैन धर्म के महाकुंभ कुण्डलपुर महामहोत्सव का पंच कल्याणक की गर्भ कल्याणक पूर्व रूप महामंडल विधान की क्रियाओं के माध्यम से संपन्न किया गया, सौधर्म इंद्रो की सभा लगाई गई, नगरी की रचना, माता पिता की स्थापना, अष्टदेवीओ से माता पिता की परिचर्या और सोलह स्वप्न के दर्शन का मंचन किया गया। संपूर्ण विधि विधान प्रतिष्ठाचार्य ब्रा ब्रह्मचारी विनय भैया के निर्देशन में संपन्न किया जा रहा है। पात्र शुद्धि,अभिषेक पूजन, शांतिधारा, नित्यमहापूजन, गर्भ कल्याणक पूजन, शांति ध्वज और आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का विशेष पूजन भक्ति संगीत के साथ किया गया।
कुण्डलपुर महामहोत्सव के अंतर्गत पंच कल्याणक के प्रारंभ दिवस पर सभी भक्तों को संदेश देते हुए कहा कि भक्त लोग भक्ति करने के पूर्व भगवान के चरणों की धूल को केसर, चंदन के समान ललाट पर लगा लेते हैं। जब चंदन को घिसते है तो वह दुनिया को सुगंधित करता है, उसे जितना जितना घिसा जाए वह चारों ओर महक फैल जाती है, कुछ ऐसे ही तपस्या करके कर्मो को जलाते जाते है। ऐसा मत मानो हजारों लाखों व्यक्ति जहां एकत्रित हो तो जनता के लिए क्या किया जा सकता है। समोशरण मे एक विभूति बैठी है असंख्यात देवी देवता, तिर्यच जीव बैठकर इधर उधर न देखकर उस विभूति को देखने में लगे हैं। अन्य ओर उनकी दृष्टि नहीं जाती। समोशरण घेरे में रहता है सामने वाला व्यक्ति तो देख लेता है इसीलिए कई लोग अपनी जगह की बुकिंग कर लेते हैं, समोशरण में विराजमान भगवान की लीला अपरम्पार होती हैं। चारों दिशाओं में उनका मुख दिखाई देता है, हर व्यक्ति को ऐसा लगता है कि भगवान तो हमारी ओर देख रहे हैं, उस दृश्य को सोचकर ही प्रसन्न हो जाते है, यह सब भावों का खेल है, अनंत काल से संस्कार बिगड़ जाने से हमारे भाव बिगड़ रहे हैं। आज महामहोत्सव के प्रथम दिन गर्भ कल्याणक का पूर्व दिन है, गर्भ में जीव आता है उसका कल्याण हो रहा है उनका वहा गर्भ में आना भी सार्थक है। सभी बड़े बाबा के निमित्त से यहां एकत्रित हुए हैं, आज से आनंद का अनुभव प्रारंभ हो चुका है, प्रारंभ के पूर्व प्रतीक्षा थी, उसमें भी आनंद मिलता था। और अब आनंद बरस रहा है। एक बार प्रभु मेरी दृष्टि में आ जाए, और भगवान की दृष्टि को अपने जीवन में भर ले। आस्था को मज़बूत बनाओ, मन में कोई विकल्प नहीं रखो, तीर्थंकर भगवान की दृष्टि से पशु पक्षियों का उद्धार हो सकता है तो फिर मनुष्य को क्यों नहीं? बस दूसरे पर अधिकार दिखाना बंद कर दें, सौधर्म इंद्र बनो पर चौधरी नहीं। भगवान असंख्यात वैभव मिलने के बाद भी किसी पर अधिकार नहीं जमाते। आज आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को नवधा भक्ति भाव से आहार देने का सौभाग्य वीरेश सेठ,राजेश सेठ, कमलेश सेठ को प्राप्त हुआ। मण्डप से आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने दोपहर में मुख्य कार्यक्रम में दिव्य देशना प्रदान की आचार्य श्री ने अपने प्रवचनों में कहा आज से आनंद प्रारंभ हो चुका है पूर्व में प्रतीक्षा थी उसमें भी आनंद मिलता था लेकिन अब आनंद बरस रहा है।
आज के दिन आचार्य श्री ने मुझे मुनि दीक्षा प्रदान की थी अभयासगर जी
इस अवसर पर आचार्य श्री के आज्ञानुवर्ती शिष्य और मुनि श्री अभय सागर जी महाराज ने अपने दीक्षा दिवस अवसर पर बताया कि 15 वर्ष ऐलक पद पर रहने के बाद आज के ही दिन 1998 आचार्य श्री ने मुनि दीक्षा प्रदान की, गुरुदेव ने कहा था कि तुम चिंता मत करो तुम्हारी चिंता हमे है। सिद्ध क्षेत्र मुक्तागिरी में सन 1998 में 9 मुनि दीक्षा दी गई जिसमें मुझे जैनेश्वरी दीक्षा प्राप्त हुई।
यह रहे मोजूद

कुण्डलपुर मेला क्षेत्र में प्रदेश शासन के मंत्री ओम प्रकाश सकलेचा, पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया, वेयर हाउसिंग लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन अध्यक्ष राहुल सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अध्यक्ष एवं विधायक प्रदुम्न सिंह, हटा विधायक पी एल तंतुवाय, कमेटी उपाध्यक्ष देवेन्द्र सेठ, वीरेन्द्र बजाज ने बाजार क्षेत्र का भ्रमण किया और बाजार समिति द्वारा सुविधाएं की प्रसंशा की। इस अवसर पर प्रभारी प्रभात सेठ,रमन खत्री, मीडिया प्रभारी महेन्द्र जैन, मानव बजाज, सम्भव सिंघई, प्रिंस जैन, दीपक जैन, नीलेश सिंघई साथ में रहे।


संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
