खरका मे भक्तामर महामंडल विधान मे श्रावको ने चढाये अर्घ,
श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा ,धर्मसभा मे हुए प्रवचन
खरका
श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उपाध्याय दयाऋषि महाराज के सानिध्य एवं विधानाचार्य देवीलाल ढालावत सलूंबर के निर्देशन में बुधवार प्रातः भक्तामर महामंडल विधान हुआ। श्रीजी का अभिषेक चुन्नीलाल चंपालाल खरकिया ने, शांतिधारा दिनेश हितेश खरकिया परिवार ने की। कार्यक्रम के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन डालचंद मालवी ने किया। प्रवक्ता अनिल स्वर्णकार ने बताया कि इस अवसर सौधर्म इंद्र मूलचंद लालचंद खरकिया सहित श्रावक- श्राविकाओ ने विधानमंडल पर संगीतमय भक्तिमय आराधना के साथ अर्घ समर्पित किए । प्रवक्ता अनिल स्वर्णकार ने बताया कि विधानमंडल पर मंगल कलश तेजपाल खरकिया ,महेंद्र खरकिया ,रमेश खरकिया धूलचंद इसरावत , धनपाल इसरावत ने स्थापित किए, साथ ही विधानमंडल के चारों कोनो पर धनराज उदावत, जसराज उदावत खेमराज इसरावत ,छोगालाल उदावत ने कलश स्थापना की। उपाध्याय दयाऋषि महाराज का पाद प्रक्षालन महेंद्र खरकिया परिवार ने और शास्त्र भेंट धनपाल इसरावत परिवार ने किया । विधान समापन पर सोहनलाल इसरावत परिवार ने मंगल आरती की। धर्मसभा में उपाध्याय दयाऋषि महाराज ने कहा कि आचार्य मानतुंग स्वामी ने भक्तामर स्त्रोत की रचना की ।

भक्तामर स्त्रोत प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की स्तुति है । श्रद्धा भाव से किया गया भक्तामर स्त्रोत का पाठ सुख शांति प्रदान करता है। जीवन की जटिलताओं को सहज बनाता है। पापों से मुक्त कराकर पुण्य मार्ग की ओर अग्रसर करता है। यदि किसी के जीवन में कोई संकट है तो भक्तामर स्त्रोत का पाठ चमत्कारी परिणाम दे सकता है। यह एकमात्र ऐसा स्त्रोत है जिसके 130 से अधिक बार विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं । भक्तामर स्त्रोत व्याधि रोग शोक निवारक सुख शांति समृद्धि प्रदायक रचना है । भक्तामर स्त्रोत के 48 काव्य के पाठ से हीलिंग चिकित्सा से कई व्यक्ति रोगों से मुक्त हो चुके हैं। इस अवसर पर कई श्रावकगण मौजूद थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
