खुशी के साथ जीने का तरीका है एकता :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी*

धर्म

*खुशी के साथ जीने का तरीका है एकता :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी*

जयपुर

प. पू. भारत गौरव श्रमणी गणिनी आर्यिका रत्न 105 गुरु माँ विज्ञाश्री माताजी ससंघ जयपुर में धर्म का परचम लहराते हुए धर्म की महती प्रभावना कर रही है । माताजी का उद्देश्य समाज मे एकता का संचार करना है । माताजी ससंघ की निर्विघ्न आहारचर्या करवाने का सौभाग्य राजकुमार जी पचेवर वालों ने प्राप्त किया । पूरे पारिवारिक जन माताजी के चरण पखारकर अपने जीवन को धन्य मान रहे थे ।
माताजी ने समाज को एकता का संदेश देते हुए कहा कि – एकता का किला सबसे सुरक्षित होता है ।

 

 

 

 

न वह टूटता है और न ही इसमें रहने वाला कभी दुःखी होता है । एकता में इतनी ताकत है कि किसी बड़े से बड़े दुश्मन को भी पराजित कर सकती है । यदि आपको एकता की ताकत देखना है तो किसी मधुमक्खी के छत्ते पर पत्थर मार कर देखो । समर्थन और विरोध विचारों का करना चाहिए व्यक्ति का नहीं , मतभेद को कभी मनभेद नहीं बनाना चाहिए । हमें तोड़ने वाले खुद टूट जाएंगे यदि हम थोड़े शिक्षित हो जाएंगे । जब हम एकता के साथ रहते हैं तो हम खुशी के साथ जीने का तरीका सीख लेते हैं ।

 

 

 

माताजी ने कहा मेरा सभी समाज से कहना है कि यदि हमें अपने धर्म को बचाना है तो हमें एकता के सूत्र में बंधना होगा । सभी एकमत होंगे तो हम अपने तीर्थों धर्म को बचा सकते हैं ।

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