जीवन में जब भी मिलेगा हाथ जोड़कर ही मिलेगा कुछ पाना है तो विनम्र बनना पड़ेगा प्रसन्न सागर महाराज
आचार्य श्री से पिच्छिका ग्रहण कर भावुक हो गए पीयूष सागर महाराज
पारसनाथ
पूज्य अंतरमना प्रसन्न सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में विनम्रता पर जोर देते हुए बाबा रामदेव की जमकर तारीफ की बोलते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में जब भी मिलेगा हाथ जोड़कर ही मिलेगा, कुछ पाना है तो विनम्रता
बनना पड़ेगा। बिना झुके कुछ नहीं मिलता। बाबा रामदेव स्वामी जी में भी वही विनम्र अभाव है, और उनके आचरण में दिखती है।
पूज्य आचार्य श्री ने यह बात चल रहे महापारणा महोत्सव के 2 दिवस बाबा रामदेव के योग शिविर में कहीं। उन्होंने सम्मेद शिखर तीर्थ अयोध्या को शाश्वत भूमि कहा और कहा कि यह कभी मिट नहीं सकती।जब कोई भी युगपुरुष का जन्म होगा तो अयोध्या में ही होगा और निर्वाण इस शाश्वत भूमि सम्मेद शिखर से ही होगा।
इस पावन बेला में जब मुनि श्री पीयूष सागर महाराज ने आचार्य गुरुवर से पिच्छिका ग्रहण की तो वह भावुक उठे और और कहां की यह अहोभाग्य है। मैं अपने गुरु का स्नेह पाकर अभिभूत हूं। और आप सभी का भी यह अहोभाग्य ही है कि साधना तपस्या के बारे में हम पढ़ा करते थे साधना हमें देखने को मिली। उन्होंने कहा कि धन्य है हम, और हमारा धर्म अंतर्मना जैसे संत को हमारे बीच गुरु बना कर भेजा। जब उन्होंने गुरुवर से पिछिका प्राप्त की तो वह क्षण बहुत ही भावुक थे। मुनि श्री स्वयं भावुक हो गए। इन पलों में सारा पांडाल भी भावुक हो उठा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
