*अन्तर्मना उवाच* (03 जून!)
*जो बाते हम पी जाते हैं*
*वो बाते हमें खा जाती है..!*
इसलिए आपने सुना होगा *एंटीबाॅडी* —- टेबलेट सिर्फ दवाइयों की दुकान पर नहीं मिलती बल्कि और भी जगह मिलती है।
*जैसे* —
🔸 आपके मोबाइल पर किसी अपने का नाम या फोटो दिख जाये और चेहरा खिल उठे — तब बनती है *एंटीबॉडी।*
🔸 जब तुम्हारे अपने, पराये हो जाये और गुरू तुमसे कहे — चिन्ता मत करो। *मैं हूँ ना।* तब बनती है *एंटीबाॅडी।*
🔸 किसी बड़ी मुसीबत में तुम फंस जाओ और तुमसे तुम्हारा दोस्त कहे, चिन्ता मत कर, मैं तेरे लिये तो जान भी कुर्बान कर सकता हूँ। तब बनती है *एंटीबाॅडी।*
🔸 माता-पिता, गुरू और धर्म की कृपा जब बरसती है, तब बनती है जिन्दगी *एंटीबॉडी।*
🔸 जिसे आप दिल से चाहते हैं, उसके लिये आपका समय बनता है *एंटीबॉडी।*
इसलिए *जो उदास है वो दासों के दास है और जो प्रसन्न है वो मेरे पास है, सबके पास है।*
*प्रसन्न रहना भी जरूरी है जिन्दगी में। आइने गुजरा हुआ वक्त नहीं बताया करते…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
