एक साथ 17 पीछी का केशलोच संपन्न
गीगला
इन दिनों ग्राम गीगला धर्मप्राण नगरी बनी हुई है, यहाँ पूज्य आचार्य सुनीलसागर महाराज संघ विराजित है, वही मंगलवार की अनुपम बेला में 17 पिच्छी धारी सन्तो के केशलोंच हुए। वही जब यह सन्त जब स्वयं जब अपने हाथों से केशो का लुचन कर रहे थे हर भक्त भावुक हो उठा।
साधुत्व यानी कठिन साधना का पथ आचार्य सुनीलसागर जी
इस भाव भीनी बेला में पूज्य आचार्य सुनीलसागर महाराज ने कहा जैन धर्म मे साधुत्व कठिन साधना का पथ है। उन्होंने कहा यही से सन्त का संतत्व निखरता है, और कुंदन बन जाता है। आगे कहा इसी कठिन साधना का एक मार्ग है केशलोंच।
मार्मिक उदबोधन में जो आचार्य श्री ने जो कहा वह सभी को भावुक कर गया, जब हमारा एक बाल टूटता है, तो हम कराह उठते है, वह बालतोड़ हमें रुग्ण कर देता है। जैन सन्त अपने स्वयं हाथो से सिर के बाल,मूंछ, दाढ़ी के बालों को एक पल में तोड़ देते है। ऐसा नही है यह साल में एक बार होता है, एक वर्ष में 3 से 4 बार की यह परम्परा है। यह तपस्या साधु के 28 मूलगुणों में निहित है। जब जैन सन्त, मुनि जब केशो का लोचन करते है, तो उनकी आत्मा की सुदरता कही गुणा बलवती होती है। अपने आत्म साधना के सौन्दर्य बलवती हो इस हेतु सन्त कठिन साधना करते है, वह इसके द्वारा संयम का पालन भी होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
